लखनऊ :
बरसों पुराने चेहरे के दर्द को SGPGI ने दी मात,बिना बड़ी सर्जरी मरीजों को मिली राहत।दो टूक : राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के पेन क्लिनिक के डॉक्टरों ने लंबे समय से चेहरे के दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है। डॉक्टरों ने न्यूनतम शल्य-हस्तक्षेप वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी थेरेपी समेत नस-केंद्रित तकनीकों के जरिए ऐसे मरीजों को राहत पहुंचाई, जिनका दर्द सामान्य उपचार और यहां तक कि सर्जरी के बाद भी वापस लौट आया था।
विस्तार :
जनपद रायबरेली निवासी 45 वर्षीय कमला देवी वर्षों से चेहरे के तेज दर्द से परेशान थीं। कई अस्पतालों में उपचार कराने के बाद उन्हें ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया माना गया और सर्जरी भी हुई, लेकिन दर्द दोबारा लौट आया। SGPGI पहुंचने पर पेन क्लिनिक के डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद पाया कि समस्या गर्दन में दबी हुई नस से जुड़ी थी। डॉक्टरों ने स्टर्नोक्लाइडोमास्टॉइड हाइड्रोडिसेक्शन के जरिए नस को मुक्त किया और संबंधित स्फेनोपैलेटाइन गैंग्लियन को रेडियोफ्रीक्वेंसी थेरेपी से शांत किया। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक राहत मिली।
●गलत बीमारी का इलाज होता रहा,जांच में सामने आया असली कारण।
अयोध्या निवासी 51 वर्षीय गीता पांडेय को कान, जबड़े और कनपटी के एक तरफ दर्द रहता था। ठंड लगने, हल्का छूने या कुछ चबाने पर दर्द बढ़ जाता था। उन्हें भी ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया मानकर उपचार दिया गया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। SGPGI में जांच के बाद पता चला कि वह ऑरिक्युलोटेम्पोरल न्यूरालजिया से पीड़ित थीं और इसकी वजह भी गर्दन की दबी हुई नस से जुड़ी थी। डॉक्टरों ने नस को मुक्त करने के साथ रेडियोफ्रीक्वेंसी प्रक्रिया की, जिसके बाद उन्हें काफी राहत मिली।
●डॉ. सुजीत गौतम बोले—इलाज काम न करे तो दोबारा जांच जरूरी।
SGPGI पेन क्लिनिक के प्रोफेसर डॉ. सुजीत गौतम ने बताया कि जब किसी मरीज का दर्द सही इलाज के बाद भी बना रहता है तो एक ही उपचार को बार-बार दोहराने के बजाय बीमारी के मूल कारण पर दोबारा विचार करना चाहिए। चेहरे का दर्द कई कारणों से हो सकता है और हर चेहरे का दर्द ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया नहीं होता।
26 सितंबर को दर्द जागरूकता कार्यक्रम
पेन क्लिनिक की ओर से 26 सितंबर को नवीन ओपीडी के कमरा नंबर 31 और 32 में दर्द जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। डॉक्टरों ने अपील की है कि लंबे समय से चेहरे के दर्द से परेशान मरीज उपचार से निराश न हों और विशेषज्ञ पेन क्लिनिक में दोबारा जांच कराएं। आधुनिक न्यूनतम शल्य-हस्तक्षेप वाली नस-केंद्रित प्रक्रियाएं जटिल और पुराने दर्द के मामलों में भी राहत का विकल्प बन रही हैं।
