मऊ :
तेज हवाओं संग बारिश से खेतों मे तैयार धान की फसल को नुकसान,किसान परेशान।।
दाने खराब होने और कटाई में बढ़ी मुश्किल की आशंका।।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से जिले में तेज हवाओं के साथ हुई भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगेती धान की फसल पकने की ओर बढ़ रही थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है। कोपागंज, मोहम्मदाबाद, मधुबन, पुराघाट, अदरी और दोहरीघाट क्षेत्र में कई स्थानों पर तेज हवा और बारिश के चलते खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है।
धान की बालियां निकलने के बाद फसल के गिरने से किसानों को उपज के साथ-साथ दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका सताने लगी है। तैयार होती फसल के ऐन वक्त पर मौसम की मार ने किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है।
खेतों में बिछी फसल, बढ़ा नुकसान का खतरा
बारिश और तेज हवाओं का सबसे अधिक असर उन खेतों में दिखाई दे रहा है, जहां धान की फसल पकने की अवस्था में पहुंच चुकी थी। तेज हवा के झोंकों से कमजोर हुए पौधे एक-दूसरे के ऊपर गिरकर खेतों में लेट गए। किसानों का कहना है कि इस अवस्था में फसल का गिरना उपज पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
खेतों में जलभराव से दानों की गुणवत्ता पर खतरा
गिरी हुई धान की फसल लगातार बारिश और खेतों में जमा पानी के संपर्क में रहने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो दाने काले पड़ने, अंकुरित होने अथवा सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को उपज की गुणवत्ता और बाजार में उचित मूल्य मिलने को लेकर चिंता सताने लगी है।
जमीन से चिपकी फसल की कटाई भी चुनौती
खड़ी फसल की तुलना में जमीन पर बिछ चुकी धान की कटाई करना किसानों के लिए अधिक कठिन होगा। फसल पूरी तरह लेट जाने से कटाई में अतिरिक्त श्रम और समय लगने के साथ लागत भी बढ़ सकती है। वहीं, यदि आने वाले दिनों में मौसम खराब रहा तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।
फसल क्षति का सर्वे कराकर मुआवजे की मांग
मौसम की मार से प्रभावित किसानों ने प्रशासन से खेतों का स्थलीय निरीक्षण कराकर फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के अंतिम दौर में थी और इसी समय हुई बारिश व तेज हवाओं से नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से क्षति का वास्तविक आकलन कराकर नियमानुसार राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों की निगाह अब मौसम पर टिकी है। यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो खेतों में गिरी धान की फसल को नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
