गौतमबुद्धनगर: ट्रेड शो में छाया बागपत का घेवर, स्वाद के साथ लोगों को भा रही बनाने की कला!!
कुरकुरे बेस और खोये की परत बनी आकर्षण का केंद्र, सावन के बाद भी 600 रुपये किलो बिक रहा बागपत का मशहूर घेवर
दो टूक//ग्रेटर नोएडा, 27 सितंबर। इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पारंपरिक उत्पाद और व्यंजन लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इसी कड़ी में वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ओडीओसी) पवेलियन में बागपत का पारंपरिक घेवर लोगों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है। स्टाल पर पहुंच रहे लोग न केवल घेवर का स्वाद चख रहे हैं, बल्कि सामने तैयार होते घेवर की पूरी प्रक्रिया को भी उत्सुकता से देख रहे हैं।
बागपत के स्टाल पर पहुंचने वाले दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोग घेवर की कुरकुराहट और ऊपर जमी खोये की परत को पसंद कर रहे हैं। खास बात यह है कि आमतौर पर सावन के मौसम की प्रमुख मिठाई माने जाने वाले घेवर की खुशबू और स्वाद सितंबर में भी ट्रेड शो में लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।
तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार
बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में पिछले तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार किया जा रहा है। इसी परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में बागपत के स्टाल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्टाल पर आने वाले कई लोग यह सवाल करते हैं कि घेवर तो आमतौर पर सावन के महीने में मिलता है, फिर सितंबर में इसकी बिक्री कैसे हो रही है।
उन्होंने बताया कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। लोगों की पसंद और मांग को देखते हुए इसे अलग-अलग समय पर भी तैयार किया जाता है। सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से भी बागपत के घेवर की जानकारी लोगों तक पहुंच रही है, जिसके कारण दूसरे शहरों से भी इसकी मांग आती है।
सामने तैयार हो रहा ताजा घेवर
ट्रेड शो में बागपत से पांच कारीगर पहुंचे हैं, जो स्टाल पर ही लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। कारीगरों द्वारा विशेष तरीके से घेवर तैयार किए जाने की प्रक्रिया लोगों के लिए किसी आकर्षण से कम नहीं है। कई लोग कुछ देर स्टाल पर रुककर घेवर तैयार होने की पूरी प्रक्रिया देखते नजर आ रहे हैं और इसके बाद इसका स्वाद भी ले रहे हैं।
दीपक गोयल के मुताबिक ट्रेड शो में घेवर की रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है। यहां बागपत का घेवर 600 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। उन्होंने बताया कि घेवर की खासियत उसके कुरकुरे बेस और ऊपर जमी खोये की परत में है। शुद्ध दूध से तैयार खोये के इस्तेमाल से इसका स्वाद और भी खास हो जाता है।
स्वाद के साथ दिख रही बागपत की पारंपरिक पहचान
ट्रेड शो में पहुंचे लोगों के लिए बागपत का घेवर केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से परिचित होने का अवसर भी बन रहा है। दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत कई लोगों ने स्टाल पर पहुंचकर घेवर का स्वाद चखा और इसे तैयार होते भी देखा।
पहली बार वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में स्थान दिया गया है। बागपत की पारंपरिक मिठाई घेवर को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे बागपत के स्थानीय स्वाद और पारंपरिक कारीगरी को प्रदेश के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों के बीच पहचान बनाने का मंच मिल रहा है।
ट्रेड शो में एक ओर जहां लोग आधुनिक उत्पादों और तकनीक से रूबरू हो रहे हैं, वहीं बागपत का घेवर उन्हें उत्तर प्रदेश की पुरानी मिठास और पारंपरिक स्वाद से जोड़ रहा है। स्टाल पर उमड़ रही लोगों की रुचि यह भी दिखा रही है कि आधुनिक बाजार के दौर में भी पारंपरिक व्यंजनों की अपनी अलग पहचान और मांग बनी हुई है।।
