शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

मऊ :नैतिक शिक्षा से ही होगा बच्चों का सर्वांगीण विकास : भगवान भाई||Mau:Only moral education will lead to the all-round development of children: Bhagwan Bhai||

शेयर करें:
मऊ :
नैतिक शिक्षा से ही होगा बच्चों का सर्वांगीण विकास : भगवान भाई
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ, 2 अक्टूबर को शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करना और उसे सत्य, सदाचार एवं मानवीय मूल्यों की ओर ले जाना है। भौतिक शिक्षा जहां जीवन में भौतिक सुविधाओं का विकास करती है, वहीं नैतिक शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व और चरित्र को मजबूत बनाती है। इसलिए वर्तमान समय में बच्चों को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा देना भी आवश्यक है। नैतिक गुणों के आधार पर ही मनुष्य समाज में सम्मान और विश्वास अर्जित करता है।
उक्त विचार माउंट आबू, राजस्थान से आए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने अमर वाणी मूक-बधिर स्कूल में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने ‘जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व’ विषय पर बच्चों को नैतिक मूल्यों और संस्कारों का महत्व समझाया।
भगवान भाई ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने मूल्यांकन, आचरण, अनुकरण, लेखन और व्यवहारिक ज्ञान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वर्तमान समाज में मूल्यों की कमी अनेक समस्याओं का प्रमुख कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि परोपकार, सेवाभाव, त्याग, उदारता, पवित्रता, सहनशीलता, नम्रता, धैर्य, सत्यता और ईमानदारी जैसे सद्गुण जीवन में नहीं आते, तब तक शिक्षा अधूरी रहती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “शिक्षा एक बीज है और जीवन एक वृक्ष। जब तक जीवन रूपी वृक्ष पर गुणों के फल नहीं आते, तब तक शिक्षा की सार्थकता पूरी नहीं होती।” नैतिक शिक्षा बच्चों में आत्मविवेक, आत्मबल और सकारात्मक सोच विकसित करती है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनते हैं।
उन्होंने कहा कि सच बोलना, चोरी न करना, अहिंसा, दूसरों के प्रति उदारता, शिष्टता, विनम्रता और सुशीलता नैतिकता के महत्वपूर्ण अंग हैं। नैतिक मूल्यों के अभाव में समाज में अनुशासनहीनता, अपराध, नशा-व्यसन, क्रोध, आपसी विवाद और मनमुटाव जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फादर रिनॉल्ट डिसोसा ने कहा कि नैतिक शिक्षा से छात्र-छात्राओं में सशक्तिकरण की भावना विकसित होती है। नैतिक मूल्यों के बिना जीवन दिशाहीन हो जाता है। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों की कमी से अज्ञानता, सामाजिक कुरीतियां, नशा और अन्य विकृतियां बढ़ती हैं, जिससे समाज के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
स्थानीय ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवा केंद्र की राजयोग शिक्षिका बी.के. एकता बहन ने कहा कि जीवन में आध्यात्मिकता के बिना नैतिकता का विकास पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने आध्यात्मिकता को स्वयं को जानने, परमात्मा को जानने और उनका स्मरण करने से जोड़ते हुए राजयोग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था की गतिविधियों एवं राजयोग के महत्व की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत के साथ हुई। अंत में बी.के. भगवान भाई ने विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को मन की एकाग्रता बढ़ाने के लिए राजयोग मेडिटेशन कराया।
इस अवसर पर बी.के. प्रीति बहन, बी.के. प्रेम भाई, रुद्र नारायण, साधना सिंह, अनीता सिंह, अंजू, सिस्टर रूबी सहित विद्यालय के शिक्षक एवं अन्य स्टाफ मौजूद रहे।