शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

लखनऊ :ऋषिकेश के तीन घाटों पर गूंजेगा सुंदरकांड, सपना गोयल की अगुआई में होगा सामूहिक पाठ।||Lucknow:Sunderkand will be recited at three ghats in Rishikesh, with a group recitation led by Sapna Goyal.||

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लखनऊ :
ऋषिकेश के तीन घाटों पर गूंजेगा सुंदरकांड, सपना गोयल की अगुआई में होगा सामूहिक पाठ।
कार्तिक माह में तीन दिन चलेगा आध्यात्मिक अनुष्ठान।
दो टूक :  सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और राष्ट्र उत्थान के उद्देश्य से संचालित ‘सुंदरकांड महा अभियान, भारत वर्ष की बने पहचान’ के तहत ऋषिकेश में तीन दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन किया जाएगा। सनातन ध्वजवाहिका सपना गोयल की अगुआई में 18 से 20 नवंबर 2026 तक ऋषिकेश के तीन प्रमुख घाटों पर सामूहिक सुंदरकांड पाठ होगा।
विस्तार :
सपना गोयल ने शुक्रवार को चिनहट स्थित सनातन धाम लॉन में आयोजित मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी में अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में तीन अलग-अलग घाटों पर सुंदरकांड का सामूहिक पाठ कर आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कृति और राष्ट्र उत्थान का संदेश दिया जाएगा।
सपना गोयल के मुताबिक, 18 नवंबर को शाम पांच बजे जानकी झूला घाट, 19 नवंबर को दोपहर एक बजे त्रिवेणी घाट और 20 नवंबर को सुबह 11 बजे परमार्थ निकेतन के पास सामूहिक सुंदरकांड पाठ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कार्तिक माह में इन आयोजनों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक अनुष्ठान सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम हैं।
सपना गोयल ने कहा कि उनका लक्ष्य भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के प्रयासों को गति देना है। इसी उद्देश्य से ‘ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति’ के माध्यम से सुंदरकांड महा अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 10 मार्च 2024 को महिला दिवस के अवसर पर लखनऊ के झूलेलाल घाट पर पांच हजार से अधिक महिलाओं ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया था। इसके बाद नैमिषारण्य सहित कोटद्वार के सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, 
हरिद्वार की हरकी पौड़ी, चित्रकूट के रामघाट, प्रयागराज के लेटे हनुमान मंदिर और कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भी सामूहिक सुंदरकांड पाठ के आयोजन किए जा चुके हैं। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मंदिर परिसर में भी डेढ़ हजार से अधिक महिलाओं ने सामूहिक पाठ किया था।
सपना गोयल ने कहा कि अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को सनातन परंपराओं से जोड़ने और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा।