लखनऊ :
CM आवास से महज 15 किमी दूर ‘चिराग तले अंधेरा'' गड्ढेदार सड़कें बनीं जान की आफत।
जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर उठे सवाल।
।।जे-बी सिंह।।
दो टूक : प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। मुख्यमंत्री आवास से महज करीब 15 किलोमीटर दूर सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की न्यू गुड़ौरा मानसरोवर योजना, एलडीए कॉलोनी, सेक्टर-ओ, कानपुर रोड और शहीद पथ के आसपास की अंदरूनी सड़कें बदहाली की मार झेल रही हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढे, टूटी सड़कें, जलभराव और कीचड़ ने स्थानीय लोगों का आवागमन मुश्किल कर दिया है। हालात देखकर यही सवाल उठ रहा है कि जब राजधानी के वीआईपी इलाकों पर लगातार नजर रहती है, तो यहां रहने वाली बड़ी आबादी की सुध आखिर कौन लेगा?
विस्तार :
लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा बसाई गई आवासीय कालोनी और सोसाइटियों से आबाद न्यू गुड़ौरा मानसरोवर योजना की कई अंदरूनी सड़कों पर लंबे समय से बदहाली का आरोप है। बारिश होते ही सड़कें पानी और कीचड़ से भर जाती हैं। गड्ढों में जमा पानी सड़क की वास्तविक स्थिति छिपा देता है और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
●योजना लॉच के दौरान बनी सड़कों का नही हुआ पुन:निर्माण।।
मानसरोवर योजना की गड्डायुक्त सड़को से
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और रोजाना नौकरी-व्यवसाय के लिए निकलने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें रोजाना इसी बदहाल रास्ते से गुजरना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से स्थायी समाधान नहीं कराया जा रहा।
●सड़क ही नहीं, सीवर और जलनिकासी भी सवालों के घेरे में।
क्षेत्रवासियों के मुताबिक समस्या सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर सीवर और जलनिकासी व्यवस्था भी परेशानी का सबब बनी हुई है। बारिश के दौरान पानी की निकासी न होने से सड़कें कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो जाती हैं। लगातार बढ़ती आबादी के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की बदहाली ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
●अक्टूबर को नगर आयुक्त को पत्र, फिर भी इंतजार।
जनसमस्या को लेकर भारतीय पत्रकार एवं मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र बहादुर सिंह ने 1 अक्टूबर 2026 को नगर आयुक्त, नगर निगम लखनऊ को पत्र देकर स्थलीय निरीक्षण कराने और क्षतिग्रस्त सड़कों की शीघ्र मरम्मत/पुनर्निर्माण की मांग की है। इसके बावजूद अब क्षेत्रवासी पूछ रहे हैं कि शिकायत और पत्राचार के बाद जमीनी कार्रवाई कब होगी?
●‘चिराग तले अंधेरा’—राजधानी में ऐसी बदहाली क्यों?
प्रदेश की राजधानी में मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही दूरी पर किसी विकसित आवासीय योजना की सड़कें गड्ढों और जलभराव से जूझें तो यह सवाल स्वाभाविक है कि एलडीए, नगर निगम, जलकल और संबंधित जिम्मेदार विभाग आखिर कर क्या रहे हैं?
विकास और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच न्यू गुड़ौरा मानसरोवर योजना की बदहाल सड़कें ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही हैं।
वीडियो ने खोली जमीनी हकीकत
क्षेत्र की बदहाल सड़कों का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें गड्ढे, जलभराव और कीचड़ की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि मौके पर निरीक्षण, जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध स्थायी समाधान की है।
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम, एलडीए, जलकल विभाग, संबंधित जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर सड़क, सीवर और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
सवाल सीधा है—राजधानी में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित सड़क का अधिकार कब मिलेगा?
