अम्बेडकर नगर :
नवरात्र मातृशक्ति की वंदना और नारी सशक्तीकरण का पर्व : डॉ. उदयराज मिश्र।।
दो टूक : या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।’’ नवरात्र का पर्व मातृशक्ति की वंदना और आराधना को समर्पित सनातन महोत्सव है। यह पर्व जहां मातृ वंदना का संदेश देता है, वहीं नारी सशक्तीकरण का भी सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। नवरात्र शक्ति की उपासना, अन्याय पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इसी भाव को भारतीय परंपरा में “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः” के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
विस्तार:
शिक्षाविद डॉ. उदयराज मिश्र ने नवरात्र के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष में आने वाले चैत्र और शारदीय नवरात्रों का भगवान श्रीराम से विशेष संबंध है। चैत्र नवरात्र के बाद रामनवमी पर प्रभु श्रीराम के अवतार का उत्सव मनाया जाता है, जबकि शारदीय नवरात्र के उपरांत विजयदशमी के दिन रावण पर श्रीराम की विजय को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि नवरात्र वस्तुतः मातृशक्ति की उपासना और नारी सम्मान का प्रमुख पर्व है। रामचरितमानस में भी आदिशक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा गया है—
“आदि शक्ति जेहि जग उपजाया।
सो अवतरिहि मोरि यह माया।।’’
उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भी मातृशक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए कहा—
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।’’
माता के स्वरूप को सर्वोच्च स्थान देते हुए देव्यपराधक्षमापन स्तोत्र में कहा गया है—
“कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।”
अर्थात पुत्र कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती।
डॉ. मिश्र के अनुसार भारतीय परंपरा में माता को बालक का प्रथम आचार्य माना गया है। नवरात्र के नौ दिनों में देवी के शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री स्वरूपों की आराधना की जाती है। ये सभी स्वरूप नारी शक्ति की विविधता और सामर्थ्य का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं में महिषासुर, रक्तबीज और मधु-कैटभ जैसे शक्तिशाली दैत्यों का संहार भी देवी शक्ति द्वारा किया गया। इसका संदेश स्पष्ट है कि नारी शक्ति का तिरस्कार करने वाला व्यक्ति अंततः महिषासुर जैसी प्रवृत्ति का प्रतीक बन जाता है और उसका पतन निश्चित है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि नवरात्र हमें नारी के प्रत्येक स्वरूप—पुत्री, बहन, पत्नी और माता—का सम्मान करने की सीख देता है। साथ ही भारत माता के प्रति श्रद्धा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का भाव भी जागृत करता है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तीकरण के बिना समाज और राष्ट्र का वास्तविक सशक्तीकरण संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र का संदेश केवल देवी की पूजा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, समान अवसर और सतत उत्थान के संकल्प के रूप में भी सामने आना चाहिए।
