मंगलवार, 29 सितंबर 2026

मऊ :राज्य पुरस्कार प्राप्त डॉ. रामविलास भारती के अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब।।||Mau:A massive crowd turned out for the final journey of State Award recipient Dr. Ramvilas Bharti.

शेयर करें:
मऊ :
राज्य पुरस्कार प्राप्त डॉ. रामविलास भारती की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब।।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : राज्य पुरस्कार प्राप्त डॉ. रामविलास भारती की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब माछिल जमीन माछिल से दोहरीघाट मुक्तिधाम तक हजारों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई।
विस्तार :
मऊ। राज्य पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक एवं जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. रामविलास भारती को मंगलवार को हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। जूनियर हाईस्कूल धरौली के प्रधानाध्यापक डॉ. भारती की अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव माछिल जमीन माछिल से निकली तो सड़क पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। घर से लेकर अंतिम यात्रा के मार्ग तक हर तरफ लोगों की भीड़ नजर आई। पत्नी और परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया।
दिल्ली में प्रशिक्षण के दौरान हृदय गति रुकने से डॉ. रामविलास भारती का असमय निधन हो गया था। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक आवास पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। शिक्षक, विद्यार्थी, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
माछिल जमीन माछिल से दोहरीघाट तक चलता रहा कारवां
पैतृक आवास से अंतिम यात्रा शुरू हुई तो माछिल जमीन माछिल से रघौली, मझवारा मोड़, घोसी, धरौली, थानीदास और गोठा होते हुए दोहरीघाट मुक्तिधाम तक लोगों का कारवां चलता रहा। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अंतिम यात्रा के दौरान कई स्थानों पर माहौल बेहद भावुक हो गया। नम आंखों के साथ लोग अपने प्रिय शिक्षक को अंतिम विदाई देते रहे। इस दौरान “जब तक सूरज-चांद रहेगा, रामविलास भारती का नाम रहेगा” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
शिक्षा के प्रति समर्पण हमेशा रहेगा याद
डॉ. रामविलास भारती ने शिक्षक के रूप में अपने दायित्व को सेवा के रूप में निभाया। धरौली विद्यालय में उनके योगदान, विद्यार्थियों के प्रति समर्पण और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब उनके प्रति लोगों के सम्मान और आत्मीय जुड़ाव का प्रमाण बना।
उनके निधन से शिक्षा जगत के साथ-साथ क्षेत्र में भी शोक की लहर है। लोगों का कहना है कि डॉ. रामविलास भारती भले ही अब उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनके पढ़ाए विद्यार्थी, विद्यालय की लाइब्रेरी और शिक्षा के प्रति उनका समर्पित जीवन उनकी स्मृतियों को हमेशा जीवित रखेगा।