शनिवार, 19 सितंबर 2026

टूटते परिवारों को जोड़ने में गौतमबुद्धनगर पुलिस की पहल बनी मिसाल, FDRC ने 1014 पारिवारिक विवादों में 906 का कराया समाधान!!

शेयर करें:

टूटते परिवारों को जोड़ने में गौतमबुद्धनगर पुलिस की पहल बनी मिसाल, FDRC ने 1014 पारिवारिक विवादों में 906 का कराया समाधान!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा। पारिवारिक और वैवाहिक विवादों के बढ़ते मामलों के बीच गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लिनिक (FDRC) पहल परिवारों को टूटने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर प्रोफेशनल काउंसलर्स, महिला सहायता प्रकोष्ठ और FDRC के माध्यम से पति-पत्नी एवं परिवारों के बीच उत्पन्न विवादों को बातचीत, काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

1 जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2026 तक कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में संचालित तीन FDRC केंद्रों पर कुल 1014 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 906 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 108 प्रकरणों में मीडिएशन की प्रक्रिया जारी है। निस्तारित मामलों में केवल 57 प्रकरणों में अभियोग दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार, कुल प्राप्त प्रार्थना पत्रों में लगभग 5.62 प्रतिशत मामलों में ही पुलिस कार्रवाई के रूप में अभियोग दर्ज हुआ, जबकि अधिकांश मामलों में काउंसलिंग और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान का प्रयास किया गया।

तीन FDRC केंद्रों पर सैकड़ों परिवारों को मिला समाधान

कमिश्नरेट में वर्तमान में FDRC सेक्टर-108, FDRC नॉलेज पार्क और FDRC चैरी काउंटी संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य पारिवारिक मतभेदों को समय रहते बातचीत और विशेषज्ञ परामर्श के माध्यम से दूर कर परिवारों में आपसी समझ और संवाद कायम करना है।

महिला सहायता प्रकोष्ठ/FDRC सेक्टर-108 में कुल 450 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 406 का निस्तारण किया जा चुका है। 44 मामले मीडिएशन के स्तर पर प्रचलित हैं। निस्तारित प्रकरणों में 32 मामलों में अभियोग दर्ज हुए।

वहीं FDRC नॉलेज पार्क में कुल 296 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 276 का निस्तारण हो चुका है और 20 मामले मीडिएशन की प्रक्रिया में हैं। निस्तारित मामलों में 11 प्रकरणों में अभियोग दर्ज किए गए।

FDRC चैरी काउंटी में कुल 268 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 224 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 44 मामले मीडिएशन के स्तर पर हैं। निस्तारित प्रकरणों में 14 मामलों में अभियोग दर्ज हुए।

काउंसलिंग से शराब छोड़ने को तैयार हुआ पति, फिर दोबारा साथ रहने पर बनी सहमति

FDRC नॉलेज पार्क में पहुंचे एक वैवाहिक विवाद का मामला इस पहल की कार्यप्रणाली को सामने रखता है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2013 में विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया। पत्नी ने पति पर शराब पीकर मारपीट करने और अतिरिक्त दहेज की मांग करने के आरोप लगाए थे। विवाद इतना बढ़ गया कि परिवार के बिखरने की स्थिति पैदा हो गई थी।

मामला पुलिस उपायुक्त महिला सुरक्षा के समक्ष पहुंचने के बाद गहन काउंसलिंग और मध्यस्थता के लिए FDRC नॉलेज पार्क भेजा गया। यहां काउंसलर्स ने दोनों पक्षों की बात सुनी और विवाद के पीछे की पारिवारिक एवं व्यवहारिक समस्याओं को समझने का प्रयास किया। कई चरणों में हुई काउंसलिंग के दौरान दंपत्ति को आपसी संवाद बढ़ाने और रिश्ते को सुधारने के लिए प्रेरित किया गया।

लगातार काउंसलिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए और पति ने वैवाहिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए शराब छोड़ने के लिए आवश्यक उपचार लेने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से दोबारा साथ रहने के लिए तैयार हो गए। FDRC की ओर से बाद में लिए गए फीडबैक में भी दोनों के आपसी प्रेम और साथ रहने की जानकारी सामने आई।

इस प्रकरण में काउंसलिंग के जरिए न केवल पति-पत्नी के बीच विवाद खत्म हुआ, बल्कि उनके दो बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित रखने में मदद मिली। पुलिस के अनुसार, यह मामला दिखाता है कि समय रहते संवाद और विशेषज्ञ परामर्श मिलने पर कई पारिवारिक विवादों को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

कानून के साथ काउंसलिंग पर भी जोर

FDRC और महिला सहायता प्रकोष्ठ की टीम में विधि एवं मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। दोनों पक्षों को अलग-अलग और संयुक्त रूप से सुनकर उनकी समस्याओं को समझने के बाद परिस्थितियों के अनुसार परामर्श और मध्यस्थता कराई जाती है। घरेलू हिंसा, दहेज और अन्य पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में भी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है।

पुलिस के मुताबिक, इन केंद्रों का उद्देश्य किसी भी पक्ष पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि विवाद के कारणों को समझते हुए आपसी सहमति से समाधान का रास्ता तलाशना है। जहां आपसी समाधान संभव नहीं होता, वहां मामले की प्रकृति के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।

कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण तथा पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा) के नेतृत्व में FDRC एवं महिला सहायता प्रकोष्ठ की टीमें पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और विवादों के समाधान में भूमिका निभा रही हैं।

पुलिस का मानना है कि FDRC की यह व्यवस्था केवल विवादों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों में संवाद, भावनात्मक सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देकर बच्चों और परिवार के सदस्यों के लिए सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण तैयार करने में भी मददगार साबित हो रही है।।