गौतमबुद्धनगर: निवेशकों के भरोसे से बदली यूपी की औद्योगिक पहचान, उद्योग लगने तक सरकार देगी पूरा सहयोग: नंदी
यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड में करीब 40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 1,142 हेक्टेयर भूमि आवंटित
दो टूक//ग्रेटर नोएडा, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निवेशकों के बीच भरोसे और विश्वसनीयता की मजबूत पहचान बनाई है। सरकार अब निवेशकों को केवल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग स्थापित होने और उत्पादन शुरू होने तक उनके साथ कदम-दर-कदम खड़ी रहेगी।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए मंत्री नंदी ने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिसमें निवेशकों को सुविधाएं, जरूरी अनुमतियां, आधारभूत ढांचा और विभागीय समन्वय एक ही व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख शहरों में आयोजित रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति विश्वास बढ़ा है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विभिन्न देशों की भागीदारी भी इसी बढ़ते संवाद और भरोसे का प्रमाण है।
डिफेंस कॉरिडोर में करीब 40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव
नंदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड—लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा—में अब तक करीब 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी निवेशक-अनुकूल व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें किसी निवेशक को अपनी फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। निवेशक के प्रदेश में आने के बाद उसकी जरूरतों को समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए समस्याओं का समाधान कराया जाए।
‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’
औद्योगिक विकास मंत्री ने कहा कि केवल जमीन उपलब्ध करा देना निवेशक सुविधा का पूरा समाधान नहीं है। उद्योग लगाने के लिए नीति, बेहतर कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचा, टेस्टिंग सुविधाएं, तकनीकी सहयोग और विभिन्न आवश्यक अनुमतियां भी समय पर मिलना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निवेशक सुविधा को केवल सरकारी कार्यालय की प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि अधिकारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली में भी इसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई देना चाहिए। सरकार का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है, जहां निवेशक को हर चरण पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग मिले।
रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए बड़े अवसर
नंदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने तक सीमित नहीं हैं। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित पूरी सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड में रक्षा विनिर्माण का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी मिल सकता है।
कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा निवेश की बुनियाद
नंदी ने कहा कि निवेश के लिए कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा तीन महत्वपूर्ण आधार हैं। प्रदेश में एक्सप्रेसवे और परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी तथा औद्योगिक आधारभूत ढांचे के विस्तार से कारोबार की संभावनाएं लगातार बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार कारोबारी प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने तथा अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने की दिशा में काम कर रही है। उद्योग और सरकार के बीच संबंध सहयोग और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए।
मंत्री ने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में देश की बढ़ती जरूरतों के साथ उत्तर प्रदेश के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेश सुरक्षित वातावरण में उत्पादन, रोजगार और तकनीकी क्षमता के विस्तार का माध्यम बने।
रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर: कर्नल संजय सिंह
यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, स्पेशल केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित कई क्षेत्र रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह केवल अनुमान पर आधारित नहीं होती, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं के आधार पर तय होती है। ऐसे में स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की स्पष्ट संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने उद्योगों से अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किन आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, टेस्टिंग सुविधाओं, आरएंडडी और निवेशक सुविधा के साथ ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें।।
