सोमवार, 28 सितंबर 2026

गौतमबुद्धनगर: श्रम संहिताएं उद्योगों के लिए आसान अनुपालन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को देंगी बढ़ावा: अनिल राजभर

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गौतमबुद्धनगर: श्रम संहिताएं उद्योगों के लिए आसान अनुपालन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को देंगी बढ़ावा: अनिल राजभर

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ उद्योग जगत के हितों का भी रखा जाएगा पूरा ध्यान, सिंगल विंडो व्यवस्था होगी मजबूत

दो टूक//ग्रेटर नोएडा, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश और प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के साथ श्रम कानूनों के अनुपालन को सरल और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के साथ उद्योग जगत के लिए अनुकूल और सुविधाजनक वातावरण तैयार करना है। श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए दोनों के हितों में संतुलन बनाकर ही प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति दी जा सकती है।

श्रम मंत्री अनिल राजभर ने यह बात सोमवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के चौथे दिन आयोजित ‘विशेष श्रम संहिताएं’ विषयक सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार उद्योगों की समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान के लिए निरंतर संवाद और सहयोग की नीति पर काम कर रही है।

नए कारखानों के पंजीयन में यूपी लगातार दो वर्षों से देश में प्रथम

अनिल राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार दो वर्षों से नए कारखानों के पंजीयन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश में उद्योगों के लिए तैयार किए गए बेहतर वातावरण और निवेश के अनुकूल नीतियों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया है। कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार, पर्याप्त बिजली की उपलब्धता और उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किए जाने से निवेश के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी बढ़े हैं।

उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक

श्रम मंत्री ने कहा कि सरकार के सामने हमेशा यह चुनौती रही है कि श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए उद्योग जगत का मनोबल भी बनाए रखा जाए। इसी उद्देश्य से श्रमिकों और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बिना उद्योग के श्रमिकों और बिना श्रमिकों के उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए दोनों के हितों, भावनाओं और भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीतियां और निर्णय लिए जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रम कानूनों में सुधार और सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने इन संहिताओं को लेकर विभिन्न हितधारकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।

उद्योगों की समस्याओं के समाधान के लिए खुले हैं सरकार के दरवाजे

अनिल राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने उद्योग जगत के लिए अपने दरवाजे हमेशा खुले रखे हैं। किसी उद्योग को किसी प्रकार की समस्या है अथवा उसे सरकार से सहयोग की आवश्यकता है तो विभागीय अधिकारी और सरकार उसके समाधान के लिए उपलब्ध हैं। सरकार उद्योग जगत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश और आज के उत्तर प्रदेश में विकास के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आया है। इस परिवर्तन में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने निवेशकों और उद्यमियों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश के विकास का लक्ष्य उद्योग जगत की सहभागिता के बिना पूरा नहीं किया जा सकता।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए संवाद और समन्वय जरूरी

श्रम मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां और बढ़ेंगी। ऐसे में सरकार और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद, सहयोग और समन्वय के माध्यम से उत्तर प्रदेश को विकास के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ाया जाएगा।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन आशीष कुमार गोयल, श्रम आयुक्त सौम्या अग्रवाल सहित जुनैद, बसंत गंगवार, राकेश द्विवेदी, बृजेश तथा गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र के श्रम विभाग के अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

श्रम संहिताओं से आसान होगा अनुपालन, सिंगल विंडो व्यवस्था को मिलेगा विस्तार : आशीष कुमार गोयल

अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन आशीष कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन के अनुरूप चार श्रम संहिताओं के माध्यम से पुराने अनेक श्रम कानूनों को समाहित कर व्यवस्था को सरल बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से उद्योग जगत की मांग रही है कि श्रम कानूनों की जटिलता और अधिक संख्या के कारण अनुपालन में आने वाली कठिनाइयों को दूर किया जाए। चारों श्रम संहिताओं के माध्यम से कानूनों को व्यवस्थित किया गया है। उत्तर प्रदेश में इनसे संबंधित अधिकांश नियमावलियां जारी हो चुकी हैं।

गोयल ने बताया कि उद्योगों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों से संबंधित आवेदन एक ही पोर्टल के माध्यम से किए जा सकेंगे। इससे उद्योगों का समय बचेगा, अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी और प्रदेश में निवेश का वातावरण और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों के हितों में संतुलन बनाते हुए श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के साथ उद्योगों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में श्रम संहिताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी और विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में इनके प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन उद्योग और श्रमिक दोनों के हित में : सौम्या अग्रवाल

श्रमायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि सत्र का उद्देश्य प्रदेश में उद्योग और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए श्रमिक सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पुराने श्रम कानूनों को समाहित करते हुए वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता लागू की गई हैं और इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि इन संहिताओं के माध्यम से मल्टीपल रजिस्ट्रेशन से मुक्ति और सिंगल विंडो व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना, श्रमिकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाना इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण पहल है।

सौम्या अग्रवाल ने कहा कि व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने के साथ महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण और समान अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल श्रम संहिताओं का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। विभाग का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें उद्योगों का विकास हो और श्रमिकों के अधिकार एवं कल्याण भी पूरी तरह सुरक्षित रहें।