शनिवार, 5 सितंबर 2026

लखनऊ : मौत के 19 साल बाद जिंदा हुआ मृतक करोड़ों की जमीन का करा दिया बैनामा।||Lucknow: The deceased, who came back to life 19 years after his death, got the land worth crores registered in his name.||

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लखनऊ : 
मौत के 19 साल बाद जिंदा हुआ मृतक करोड़ों की जमीन का करा दिया बैनामा।।
◆बन्थरा में मृतक की जमीन पर बड़ा फर्जीवाड़ा।
।।डी एस शास्त्री।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना बन्थरा क्षेत्र में जमीन की जालसाजी का ऐसा खेल सामने आया है जिसने राजस्व और रजिस्ट्री व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस व्यक्ति की मौत 19 साल पहले हो चुकी थी उसी के नाम पर जिंदा बनकर फर्जी पहचान पत्र और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे उसकी कृषि भूमि का बैनामा करा दिया गया। इतना ही नहीं, कथित फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए जमीन को महज 28 दिन बाद ही दोबारा बेच दिया गया। जानकारी होने पर परदेशी पीडित ने स्थानीय मे लिखित तहरीर दे हुए एफआईआर की फरियाद लगाई लेकिन भू माफियाओं के आगे पुलिस ने पीडित की एक नही सुनी इसके बाद पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई वहां से भी निराश होने पर पीडित न्यायालय के चौखट पर पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर बन्थरा पुलिस ने बीते 4 सितम्बर को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी।
विस्तार : 
मिली जानकारी के अनुसार थाना बन्थरा क्षेत्र बनिया खेड़ा गढ़ी चुनौटी के मूल निवासी ओम नारायण पुत्र स्व० भाईलाल ऊर्फ भईया लोध परिवार के साथ जीवकोपार्जन के लिए आन्ध्र प्रदेश मे रहते है जिनकी गॉव मे काफी पैतृक खेती बारी की बेशकीमती जमीने है।।
भू -माफियाओं ने फर्जीवाड़ कर 1.18 हेक्टेयर जमीन हड़पने की साजिश।।
इनके अनुसार उनके पिता स्व. भाईलाल उर्फ भइया लाल की मृत्यु 03 मई 2005 को हो चुकी थी। इसके बावजूद आरोप है कि एक अज्ञात व्यक्ति भाईलाल पुत्र स्व. कोकाई बनकर सामने आया और 07 मार्च 2024 को खसरा संख्या 28 में दर्ज जमीन का बैनामा राजू के पक्ष में करा दिया। रजिस्ट्री के दस्तावेजों में संजय और गोविन्द को गवाह बनाया गया।
◆फर्जी वाड़े के खुलासे से पहले 
जालसाजो ने 28 दिन में दो बार बेच दी जमीन!”
आरोप है कि फर्जीवाड़े की परत खुलने से पहले ही 04 अप्रैल 2024 को वही जमीन राजू ने सुजीत के पक्ष में दोबारा बैनामा कर दी। यानी मृतक के नाम से शुरू हुआ कथित फर्जीवाड़ा कुछ ही दिनों में जमीन की दूसरी बिक्री तक पहुंच गया।
परिवार के लंबे समय से गांव से बाहर रहने का फायदा उठाकर पूरी साजिश रचे जाने का आरोप है। पीड़ित को 15 जनवरी 2025 को गांव आने पर खेत में दूसरे लोगों के काम करने से जमीन के बिकने की जानकारी हुई। रजिस्ट्री कार्यालय में पड़ताल के बाद कथित तौर पर दो बैनामों का खुलासा हुआ।
◆सरकारी ब्यवस्थाओं पर खड़े हो रहे बड़ा सवाल ,कही कुछ नही सुरक्षित।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन मालिक की मृत्यु 2005 में हो चुकी थी तो 2024 में उसके नाम से बैनामा आखिर कैसे पंजीकृत हो गया? फर्जी पहचान की जांच किस स्तर पर हुई और रजिस्ट्री के दौरान मृतक व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने वाली व्यवस्था कहां थी—ये सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में हैं।
पीड़ित का आरोप है कि थाने से लेकर उच्च पुलिस अधिकारियों तक शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई। आखिरकार उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच कराने की मांग की है। अब निगाहें न्यायालय के आदेश और पुलिस की जांच पर टिकी हैं।