शनिवार, 1 अगस्त 2026

"मैं उन बच्चों को क्षमा करता हूं" — PM मोदी का बड़ा दिल, बोले- नफरत नहीं, सही संस्कार और मार्गदर्शन दें!!

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"मैं उन बच्चों को क्षमा करता हूं" — PM मोदी का बड़ा दिल, बोले- नफरत नहीं, सही संस्कार और मार्गदर्शन दें!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले नाबालिग बच्चों को लेकर बड़ा और संवेदनशील संदेश दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि बच्चों की एक गलती को उनकी पूरी पहचान नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि किसी बच्चे से आवेश, अपरिपक्वता या बहकावे में आकर कोई अनुचित कार्य हो जाता है, तो उसे सुधारने और सही मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की भी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश में कहा, "मैं उन बच्चों को क्षमा करता हूं। वे अभी छोटे हैं, उनसे गलती हो सकती है। मेरी समाज से भी प्रार्थना है कि उन बच्चों के प्रति कोई दुर्भावना न रखे। उन्हें अपनाइए, उन्हें सही संस्कार और सही दिशा दीजिए। वे भी इसी देश के बच्चे हैं और आगे चलकर देश के अच्छे नागरिक बनेंगे।"

वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बच्चों को नफरत या तिरस्कार से नहीं, बल्कि प्रेम, संवाद और संस्कारों से बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे की एक भूल को उसके पूरे भविष्य का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि समय रहते उसे सही मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण मिले तो वह अपनी गलती से सीखकर समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी नागरिक बन सकता है।

उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि ऐसे बच्चों के प्रति घृणा या प्रतिशोध का भाव रखने के बजाय उन्हें अपनाने और आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। उनका मानना है कि बच्चों के मन में अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच का बीज बोना ही एक जिम्मेदार समाज की पहचान है।

प्रधानमंत्री का यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल के दिनों में उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले कुछ नाबालिगों का मामला चर्चा में रहा। इस पूरे घटनाक्रम पर उन्होंने दंड की भावना के बजाय क्षमा, संवेदनशीलता और सुधार का संदेश देते हुए कहा कि बच्चों को गलती सुधारने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने इसे सामाजिक समरसता और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संदेश बताया है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि किशोरावस्था में कई बार बच्चे आवेश, अपरिपक्वता या दूसरों के प्रभाव में आकर गलतियां कर बैठते हैं। ऐसे में उन्हें कठोर आलोचना के बजाय उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल देना अधिक प्रभावी होता है।

प्रधानमंत्री के इस संदेश ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा और सामाजिक संस्कार हर नागरिक की जिम्मेदारी हैं। साथ ही उन्होंने यह संदेश दिया कि गलती करने वालों को सुधार का अवसर देना ही एक संवेदनशील, परिपक्व और मजबूत समाज की पहचान है।।