मऊ :
पड़ोसी से परेशान महिला दूसरी बार पानी की टंकी पर चढ़ी; रेलवे स्टेशन के पास घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जनपद मुख्यालय स्थित रेलवे स्टेशन के समीप शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला अचानक पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन, कोतवाली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। महिला को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए कई घंटे तक समझाने-बुझाने का प्रयास चलता रहा।
विस्तार :
पुलिस के अनुसार, टंकी पर चढ़ने वाली महिला की पहचान रानीपुर थाना क्षेत्र के अकबरपुर निवासी सपना सिंह पत्नी राजीव सिंह के रूप में हुई है। महिला का अपने पड़ोसी अरविंद और अंजनी से लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है।महिला का आरोप है कि पड़ोसी उसके खेत में कूड़ा फेंकते हैं। विरोध करने पर विवाद और अभद्रता करते हैं। शुक्रवार को भी इसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद वह रेलवे स्टेशन परिसर स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गई।
आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिससे क्षुब्ध होकर उसने विरोध के तौर पर पानी की टंकी पर चढ़ने जैसा खतरनाक कदम उठा लिया।
बताया जा रहा है कि पिछले दो महीनों में यह दूसरी घटना है, जब यही महिला अपनी मांगों को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ी। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि पहली घटना के बाद ही मामले का प्रभावी समाधान किया गया होता, तो शायद दोबारा ऐसी नौबत नहीं आती।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया। अधिकारियों ने काफी देर तक महिला से बातचीत की और उसे भरोसा दिलाया कि उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाने और विश्वास दिलाने के बाद महिला आखिरकार नीचे उतरने के लिए तैयार हो गई।
महिला के सकुशल नीचे उतरते ही अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद पुलिस महिला को अपने साथ लेकर गई, जहां उससे पूरे मामले की जानकारी ली गई और आवश्यक परामर्श भी दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि महिला की शिकायत की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जनसमस्याओं का समय पर समाधान हो, तो लोगों को अपनी आवाज उठाने के लिए इस तरह अपनी जान जोखिम में डालने की नौबत नहीं आएगी।
बताते दे-- जमीन का विवाद केवल कागजों का मामला नहीं होता, बल्कि कई बार यह लोगों को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ देता है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर विरोध करने को मजबूर हो जाते हैं। सवाल यह है कि जब यही महिला दो महीने पहले भी पानी की टंकी पर चढ़ चुकी थी, तो उसकी शिकायत का स्थायी समाधान आखिर क्यों नहीं किया गया? यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, तो शायद प्रशासन को दूसरी बार ऐसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ता।
