बुधवार, 26 अगस्त 2026

लखनऊ :वरिष्ठ नागरिकों के लिए एम्स की तर्ज पर यूपी में एनसीए भवन स्थापित करने की मांग।||Lucknow:Demand for setting up of an NCA building in UP on the lines of AIIMS for senior citizens.||

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लखनऊ :
वरिष्ठ नागरिकों के लिए एम्स की तर्ज पर यूपी में एनसीए भवन स्थापित करने की मांग।
दो टूक : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को पत्र भेजकर दिल्ली एम्स की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में नेशनल सेंटर फॉर एजिंग (एनसीए) भवन स्थापित किए जाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पत्र भेजा है।
विस्तार : 
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से जोड़कर सराहनीय कदम उठाया है। इसके साथ ही बीपीएल नागरिकों, राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों एवं अन्य पात्र कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिल रहा है। लेकिन बढ़ती संख्या के चलते मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त साबित नहीं हो रही हैं और बुजुर्ग मरीजों को इलाज के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने दिल्ली एम्स में स्थापित नेशनल सेंटर फॉर एजिंग का उदाहरण देते हुए बताया कि यह केंद्र विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित है। यहां जेरेटिक केयर के तहत बुजुर्गों को एक ही छत के नीचे मानसिक रोग, आर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी और सर्जरी जैसी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
एनसीए में डिमेंशिया और अल्जाइमर से पीड़ित बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था के साथ सुनने संबंधी समस्याओं के उपचार की सुविधा भी है। साथ ही उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों पर शोध और चिकित्सकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए करीब 200 बेड आरक्षित किए गए हैं।
इं. हरिकिशोर तिवारी ने मांग की कि उत्तर प्रदेश में भी एम्स, मेडिकल कॉलेजों, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्विज्ञान संस्थान तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में दिल्ली एम्स की तर्ज पर एनसीए भवन स्थापित किए जाएं। इससे प्रदेश के बुजुर्गों को एक ही स्थान पर समग्र एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी और उन्हें इलाज के लिए अलग-अलग विभागों में भटकना नहीं पड़ेगा।