लखनऊ :
PGI थाने में दरोगा समेत पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज, सीसीटीवी-फोटो साक्ष्यों के दावे से मचा हड़कंप।
सुबह लखनऊ से उठाया,5 घंटे बाद बिजनौर में दिखाई गिरफ्तारी।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना पीजीआई में न्यायालय के आदेश पर दरोगा गौतम कुमार समेत सिपाही अमित कुमार ,राहुल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई—सीसीटीवी और फोटो साक्ष्यों के आधार पर अपहरण का मुकदमा पंजीकृत हुआ है।
विस्तार :
थाना पीजीआई क्षेत्र से मामला सामने आया है पुलिस कार्रवाई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। थाना पीजीआई क्षेत्र गोकुल धाम कालोनी
तेलीबाग निवासी महेंद्र सिंह सैनी ने आरोप लगाया है कि 19 सितंबर 2024 की सुबह बिजनौर पुलिस के कुछ कर्मी सादे कपड़ों में उनके घर पहुंचे और उनके दो बेटों राहुल व कबिंद्र को जबरन उठाकर अर्टिगा कार से ले गए। आरोप है कि करीब पांच घंटे बाद दोनों की गिरफ्तारी बिजनौर जनपद के नूरपुर थाना क्षेत्र में दिखाई गई।
मामले में महेंद्र सिंह की ओर से सीजेएम न्यायालय, लखनऊ में प्रार्थना पत्र दिया गया। शिकायत में बिजनौर पुलिस के दरोगा गौतम, कांस्टेबल अमित कुमार, कांस्टेबल राहुल सहित दो अज्ञात पुलिस कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। न्यायालयीय प्रक्रिया के बाद पीजीआई थाने में मुकदमा दर्ज कर उपनिरीक्षक शिवेंद्र प्रताप सिंह को विवेचना सौंपी गई है।
घर में घुसकर बेटों को उठाने का आरोप।
शिकायतकर्ता के अनुसार 19 सितंबर 2024 को सुबह करीब 6:30 बजे चार लोग सफेद रंग की अर्टिगा कार संख्या UP16ET8668 से उनके तेलीबाग स्थित आवास पहुंचे। आरोप है कि सभी सादे कपड़ों में थे और खुद को बिजनौर पुलिस का कर्मचारी बताया।
महेंद्र सिंह का आरोप है कि इन लोगों ने उनके बेटों राहुल और कबिंद्र को जबरन अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। विरोध करने पर उनके साथ भी मारपीट की गई और दोनों बेटों को जबरदस्ती कार में बैठाकर ले जाया गया। शिकायत में पुलिसकर्मियों पर धमकी देने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देने का भी आरोप लगाया गया है। कि इस दौरान उसके दो मोबाइल फोन और उनमें लगे सिम भी जबरन छीन लिए गए।
लखनऊ से उठाने का आरोप, बिजनौर में गिरफ्तारी दिखाई।
मामले का सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायतकर्ता के दोनों बेटों की सुबह लखनऊ स्थित आवास से ले जाने के बाद करीब 11:50 बजे नूरपुर, बिजनौर में गिरफ्तारी दिखाई गई।
महेंद्र सिंह का दावा है कि उनके पास घर और घटनास्थल से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और फोटो मौजूद हैं, जिनमें कथित तौर पर बिजनौर पुलिस कर्मियों की लखनऊ में मौजूदगी और अर्टिगा कार से दोनों युवकों को ले जाने की तस्वीरें हैं। शिकायत में कहा गया है कि दोनों युवकों को बाद में मुकदमा अपराध संख्या 341/2024 में विभिन्न धाराओं के तहत वांछित अभियुक्त बताते हुए नूरपुर क्षेत्र से गिरफ्तार दिखाया गया।
जमानत के बाद भी धमकाने का आरोप।
शिकायतकर्ता के मुताबिक दोनों बेटों को उक्त मुकदमे में 3 अक्टूबर 2024 को जमानत मिल गई। इसके बाद भी कथित पुलिस कर्मियों की ओर से धमकियां दिए जाने का आरोप लगाया गया है। उन्हें और उनके बेटों को दोबारा उठाकर जेल भेजने तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई, जिससे पूरा परिवार भय के माहौल में रहा।
थाने से लेकर अधिकारियों तक लगाई गुहार।
शिकायतकर्ता महेंद्र सिंह के अनुसार घटना के तत्काल बाद 19 सितंबर 2024 को पीजीआई थाने में लिखित शिकायत दी गई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद 4 दिसंबर 2024 को रजिस्टर्ड डाक के जरिए पीजीआई थाने को शिकायत भेजी गई इसके बाद पुलिस कमिश्नर लखनऊ, राज्य मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी शिकायतें भेजने का दावा किया है। आरोप है कि कई स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
अब विवेचना में खुलेगा घटनाक्रम का सच।
पीजीआई इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उक्त मामला कोर्ट के आदेश पर बीते 24 अगस्त को मुकदमा दर्ज कर लिया गया है इसकी विवेचना उपनिरीक्षक शिवेंद्र प्रताप सिंह को सौंपी गई है।जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि 19 सितंबर 2024 को संबंधित पुलिसकर्मी वास्तव में लखनऊ में मौजूद थे या नहीं, अर्टिगा कार की भूमिका क्या थी, सीसीटीवी एवं फोटो साक्ष्य कितने प्रमाणिक हैं और दोनों युवकों की गिरफ्तारी का वास्तविक घटनाक्रम क्या था।
