लखनऊ :
आशियाना में सड़क किनारे खड़ी रही मौत की कार आशियाना पुलिस की गश्त पर उठे सवाल,दुर्गंध उठने के बाद खुला राज।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र में पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। सालेहनगर तिराहे पर कथित तौर पर दो दिनों से लावारिस खड़ी एक कार में युवक का शव पड़ा रहा, लेकिन न तो स्थानीय पुलिस की नजर उस पर पड़ी और न ही नियमित गश्त के दौरान किसी ने उसकी जांच जरूरी समझी। गुरुवार देर रात कार से तेज दुर्गंध उठने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी,जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
विस्तार:
सूत्रों के अनुसार थाना आशियाना क्षेत्र सालेहनगर तिराहे पर खड़ी स्विफ्ट डिजायर कार (UP 33 BB 8989) से गुरुवार देर रात तेज बदबू आने लगी। आशंका होने पर राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची आशियाना पुलिस ने कार का शीशा तोड़कर अंदर देखा तो चालक सीट के पास एक युवक मृत अवस्था में पड़ा मिला। पुलिस उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जांच के दौरान सामने आया कि शव करीब तीन दिन पुराना प्रतीत हो रहा है। यदि ऐसा है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर के व्यस्त इलाके में तीन दिनों तक खड़ी एक संदिग्ध कार पुलिस की नजर से कैसे बची रही? स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन लगातार वहीं खड़ा था, फिर भी पुलिस गश्त के दौरान उसकी जांच नहीं की गई।
बाद में सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने लगी।
आशियाना पुलिस के अनुसार वाहन के अंदर मिले एक आई-कार्ड पर अंकित मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर मृतक की शिनाख्त ज्ञानेन्द्र सिंह पुत्र उदयभान सिंह, उम्र लगभग 36 वर्ष, निवासी- निराला नगर, निकट हनुमान मंदिर जनपद रायबरेली तथा वर्तमान पता-किराये का मकान, पवनपुरी, देवीखेड़ा, थाना आशियाना, लखनऊ के रूप में हुई है।
मृतक के भाई सतीवेन्द्र सिंह द्वारा की गई पूछताछ में ज्ञात हुआ कि मृतक लखनऊ में रहकर Kissht नामक डिजिटल लेंडिंग (फिनटेक) कंपनी में कार्यरत था, जो पर्सनल लोन एवं अन्य डिजिटल ऋण सेवाएं उपलब्ध कराती है।
परिजनों के पहुंचने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस का कहना है कि घटना स्थल के
आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
●गश्त व्यवस्था पर गंभीर सवाल।।।
यह घटना पुलिस की रात्रि गश्त और संदिग्ध वाहनों की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। यदि किसी व्यस्त इलाके में एक कार लगातार कई दिनों तक लावारिस खड़ी रही और उसके भीतर शव मौजूद था, तो नियमित पेट्रोलिंग, बीट पुलिसिंग और संदिग्ध वाहनों की जांच व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है यदि जांच में गश्त या निगरानी में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
