गौतमबुद्धनगर: जिला अस्पताल में इलाज के लिए तड़पती रही महिला, लाचार परिजन लगाते रहे मदद की गुहार; सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे गंभीर सवाल!!
दो टूक//नोएडा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत बयां करती नोएडा जिला अस्पताल से सामने आई एक बेहद संवेदनशील तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला के मंजिल से गिरकर घायल होने के बाद उसके परिजन उसे इलाज की उम्मीद में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि अस्पताल में समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण परिजन डॉक्टरों और कर्मचारियों के चक्कर काटते रहे। काफी देर तक इंतजार और मदद की गुहार के बावजूद जब स्थिति नहीं सुधरी तो परिजनों को घायल महिला को निजी अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अस्पताल की कथित अव्यवस्था और मरीज के परिजनों की बेबसी साफ दिखाई दे रही है। एक तरफ घायल महिला दर्द से कराहती नजर आती है, वहीं दूसरी ओर उसके परिजन इलाज के लिए इधर-उधर भटकते दिखाई देते हैं। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला है और सवाल खड़ा करता है कि आखिर आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही है?
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में कितना अंतर?
नोएडा जिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे लगातार किए जाते रहे हैं, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली ऐसी तस्वीरें इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती हैं। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और उनके तीमारदार अगर इलाज के लिए ही इधर-उधर भटकते रहें तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कई बार मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और उन्हें दिल्ली या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। गंभीर मरीज के लिए रेफरल के दौरान निकलने वाला समय कई बार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या जिला अस्पताल में आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय व्यवस्था और जिम्मेदार स्टाफ मौजूद है?
स्वास्थ्य मंत्री से जांच की मांग
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से भी मामले का संज्ञान लेने और अस्पताल की व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। सवाल यह है कि जब सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है, तो नोएडा जैसे महत्वपूर्ण शहर के जिला अस्पताल में ऐसी स्थिति क्यों सामने आ रही है?
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री पहले भी नोएडा की स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन यदि इसके बावजूद मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है तो अस्पताल के कामकाज के तरीके में सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
‘सरकारी अस्पताल पर भरोसा करें भी तो कैसे?’
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी घायल या गंभीर मरीज को सरकारी अस्पताल में पहुंचने के बाद भी तत्काल इलाज के लिए इंतजार करना पड़े, तो आम आदमी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा कैसे करे?
यह मामला केवल एक महिला के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल है जहां अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को समय पर इलाज, संवेदनशील व्यवहार और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलना उसका अधिकार है।
अब जरूरत इस बात की है कि जिला अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग वायरल वीडियो में सामने आई घटना की निष्पक्ष जांच कराएं। यह भी स्पष्ट किया जाए कि महिला को तत्काल उपचार क्यों नहीं मिल सका, उस समय ड्यूटी पर कौन-कौन से चिकित्सक और कर्मचारी मौजूद थे और मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की नौबत आखिर क्यों आई।
उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग इस तस्वीर में दिखाई दे रही महिला की पीड़ा को गंभीरता से समझेगा और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करेगा, ताकि भविष्य में किसी दूसरे मरीज और उसके परिवार को ऐसी बेबसी का सामना न करना पड़े।
