रविवार, 2 अगस्त 2026

गौतमबुद्धनगर: नोएडा में फिर ‘खुली मौत’ का शिकार हुआ मासूम: प्राधिकरण के पंप हाउस की होदी में डूबकर 4 साल के फिरोज की दर्दनाक मौत!!

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गौतमबुद्धनगर: नोएडा में फिर ‘खुली मौत’ का शिकार हुआ मासूम: प्राधिकरण के पंप हाउस की होदी में डूबकर 4 साल के फिरोज की दर्दनाक मौत!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

ग्रेटर नोएडा में मासूम की गड्ढे में डूबने की घटना के बाद नोएडा में भी सामने आया दर्दनाक हादसा, खुले जलस्रोत और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल—FIR के बाद अब जिम्मेदारी तय होने का इंतजार

दो टूक//नोएडा। शहर में खुले गड्ढों, टंकियों और बिना सुरक्षा इंतजाम वाले जलस्रोतों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में छह वर्षीय बच्चे की गहरे गड्ढे में गिरकर मौत का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि नोएडा में एक और मासूम की जान चली गई। नोएडा प्राधिकरण द्वारा बनाए गए पंप हाउस की होदी में डूबने से चार वर्षीय फिरोज आलम उर्फ गोलू की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सेक्टर-123 में पार्थला गोलचक्कर के पास झुग्गी बस्ती क्षेत्र में हुआ। घटना के बाद परिजनों में मातम और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

पुलिस के अनुसार मृतक बच्चे की पहचान मुराजुद्दीन के चार वर्षीय बेटे फिरोज आलम उर्फ गोलू के रूप में हुई है। बच्चा मूल रूप से सीतापुर जिले का रहने वाला था और अपने परिवार के साथ सेक्टर-123 स्थित झुग्गी बस्ती में रह रहा था। उसके पिता नोएडा में मजदूरी करते हैं।

बताया जा रहा है कि बच्चा पानी पीने के लिए गया था। इसी दौरान वह पानी से भरी होदी में गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

हादसे के बाद FIR, अब जिम्मेदारी तय करने की चुनौती

घटना के संबंध में थाना सेक्टर-113 पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण के संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर लोगों की आवाजाही होती है, वहां प्राधिकरण के पंप हाउस की होदी को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना कैसे छोड़ा गया?

स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों की ओर से प्राधिकरण की लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित पंप हाउस और होदी की देखरेख किस विभाग के जिम्मे थी, वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम होने चाहिए थे और उन्हें सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की थी।

एक हादसा, फिर दूसरा... आखिर कब जागेगा सिस्टम?

इस दर्दनाक घटना ने हाल में ग्रेटर नोएडा में हुए उस हादसे की याद भी ताजा कर दी, जिसमें छह वर्षीय बच्चे की बारिश के पानी से भरे करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। वह गड्ढा बोरिंग के लिए खोदा गया था और बारिश के बाद पानी से भर गया था। बच्चे की मौत के बाद भी खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

अब नोएडा में चार वर्षीय बच्चे की मौत ने एक बार फिर वही सवाल सामने खड़ा कर दिया है—क्या प्रशासन और प्राधिकरण हादसे होने के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे, या हादसे से पहले ही संभावित खतरे को खत्म करने की जिम्मेदारी निभाई जाएगी?

फाइलों में जांच नहीं, जमीन पर चाहिए कार्रवाई

शहर में सड़क किनारे खुले गड्ढे हों, बारिश के पानी से भरे निर्माण स्थल हों या फिर बिना सुरक्षा घेराबंदी के जलस्रोत—इन स्थानों पर सबसे ज्यादा खतरा मासूम बच्चों और आम लोगों को रहता है। ऐसे में केवल हादसे के बाद FIR और जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

नोएडा प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों को मामले का गंभीरता से संज्ञान लेकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहर में ऐसे सभी खुले गड्ढों, होदियों, टंकियों और जलस्रोतों का तत्काल सर्वे कराया जाए। जहां भी सुरक्षा मानकों का अभाव मिले, वहां तत्काल बैरिकेडिंग, ढक्कन या अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

क्योंकि सवाल सिर्फ चार साल के फिरोज आलम की मौत का नहीं है। सवाल यह है कि क्या अगला मासूम भी किसी खुले गड्ढे या असुरक्षित होदी का शिकार बनने के बाद ही सिस्टम को उसकी मौजूदगी दिखाई देगा?

जांच की फाइल खुलेगी, जिम्मेदारी तय होगी और कार्रवाई भी होगी—या फिर एक मासूम की मौत कुछ दिनों बाद सिर्फ एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगी?