लखनऊ :
एनपीसीआई कर्मचारी बनकर बीमा पॉलिसी सरेंडर कराने के नाम पर युवती से 15.48 लाख की साइबर ठगी।।
दो टूक: राजधानी लखनऊ में साइबर ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है। कृष्णानगर थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती को कथित तौर पर एनपीसीआई (National Payments Corporation of India) का कर्मचारी बनकर फोन किया गया और उसकी पॉलिसी सरेंडर रिक्वेस्ट आने की बात कहकर विश्वास में लिया गया। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रिया के नाम पर कुल 15 लाख 47 हजार 950 रुपये एक खाते में ट्रांसफर करा लिए गए। बाद में पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ। जब साइबर ठग लगातार सरकारी और वित्तीय संस्थानों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं, तो ऐसे फर्जी मोबाइल नंबरों और संदिग्ध बैंक खातों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है?
विस्तार:
मिली जानकारी के अनुसार कृष्णानगर क्षेत्र निवासी प्रियम भावनानी के मुताबिक 29 जुलाई 2026 को उनके पास श्याम नारायण दूबे नामक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को एनपीसीआई का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से पॉलिसी सरेंडर की रिक्वेस्ट आई है। उसकी बातों पर विश्वास कर पीड़िता ने बताए गए बैंक खाते में कुल 15,47,950 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पीड़िता के अनुसार रकम भेजने के बाद जब मामले की वास्तविकता सामने आई तो पता चला कि उसके साथ साइबर फ्रॉड किया गया है। रकम एक्सिस बैंक के खाते में ट्रांसफर कराई गई थी।
पहले भी दर्ज कराई थी शिकायत
पीड़िता ने बताया कि मामले को लेकर पहले डालीगंज में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसकी शिकायत संख्या CCPS-87/2026 बताई गई है। इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, जिसका Acknowledgement No. 23108260164164 है।
कृष्णानगर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
पीड़िता की तहरीर के आधार पर कृष्णानगर पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तहरीर में कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस अब बैंक खाते, मोबाइल नंबर और रकम के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर साइबर ठगी में शामिल आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
साइबर ठगों का नया तरीका, सतर्क रहने की जरूरत।
इस घटना ने एक बार फिर साइबर ठगों के बदलते तौर-तरीकों को उजागर किया है। सरकारी अथवा वित्तीय संस्थान का कर्मचारी बनकर लोगों को फोन करना, पॉलिसी, बैंक खाते या केवाईसी से जुड़ी समस्या बताकर दबाव बनाना और फिर खाते में रकम ट्रांसफर कराना साइबर अपराधियों का आम तरीका बनता जा रहा है। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर खाते से रकम ट्रांसफर करने से पहले संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना बेहद जरूरी है।
