लखनऊ :
14 साल बाद भी नहीं मिला प्लॉट, Ansal कंपनी पर दो और धोखाधड़ी के नए मुकददमे हुए दर्ज, बड़ी मुश्किले||
दो टूक : राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में रियल एस्टेट कंपनी Ansal Properties and Infrastructure Limited की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। वर्षों पहले प्लॉट बुक कर लाखों रुपये जमा करने के बावजूद कब्जा न मिलने और धनराशि वापस न किए जाने के आरोप में कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। दोनों मामलों में पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने उनकी मेहनत की कमाई लेकर न तो प्लॉट दिया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दे रहे है।।
विस्तार :
पहला मामला : 2011 में बुक कराया प्लॉट, 14 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा।
फर्रुखाबाद निवासी सुकृत रस्तोगी ने दर्ज कराई गई शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी बबिता रस्तोगी ने 31 अक्टूबर 2011 को सुशांत गोल्फ सिटी के सेक्टर-ओ, पॉकेट-4 में 200 वर्गमीटर का प्लॉट बुक कराया था। इसके लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 6,19,052 रुपये का भुगतान किया गया।
पीड़ित का आरोप है कि भुगतान के बाद कई वर्षों तक कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों से प्लॉट का कब्जा दिलाने की गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार टालमटोल की गई। आज तक न तो प्लॉट का कब्जा मिला और न ही कोई ठोस समाधान दिया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने धोखे में रखकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प ली।
दूसरा मामला :
12.51 लाख जमा करने के बाद भी नहीं मिला प्लॉट।
दूसरे मामले में गोमती नगर निवासी पवन अरोड़ा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी शिवानी पवन ने 29 अगस्त 2012 को Pine Wood Villas परियोजना में 1315 वर्गफुट का प्लॉट बुक कराया था। इसके लिए IDBI बैंक के माध्यम से 12,51,952 रुपये कंपनी को जमा किए गए।
शिकायत के मुताबिक भुगतान के बाद कई बार कंपनी के कार्यालय और अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन न तो प्लॉट दिया गया और न ही जमा धनराशि लौटाई गई। पीड़ित का आरोप है कि कंपनी और उसके जिम्मेदार अधिकारियों ने उनके साथ विश्वासघात और धोखाधड़ी की है।
दोनों पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर थाना सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने कंपनी के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
रियल एस्टेट सेक्टर में वर्षों से लंबित परियोजनाओं को लेकर खरीदारों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद प्लॉट का कब्जा न मिलना और लाखों रुपये फंसे रहना गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच के बाद पीड़ितों को न्याय और उनकी जमा पूंजी वापस दिलाने की दिशा में क्या कार्रवाई होती है।
