लखनऊ :
STF ने नैनी ITI में परीक्षा माफिया का किया भंडाफोड़,प्रिंसिपल समेत 11 गिरफ्तार,परीक्षा केंद्र के भीतर 4 हजार में बिक रही थी सफलता।
दो टूक : उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी में चल रही अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा की कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षा में बड़े पैमाने पर हो रहे परीक्षा घोटाले का पर्दाफाश करते हुए संस्थान के प्रधानाचार्य, परीक्षा प्रभारी, चार अनुदेशकों और पांच सॉल्वरों सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि कमजोर अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह दूसरे लोगों से परीक्षा दिलाई जा रही थी और पूरे खेल को संस्थान के अंदर से संचालित किया जा रहा था। एसटीएफ ने बड़ा खुलासा करते हुए सभी को गिरफ्तार स्थानीय थाने में दाखिल कर अग्रिम कार्रवाई कर रही है।
विस्तार :
यूपी एसटीएफ के अनुसार, लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि 11 जुलाई से 8 अगस्त तक आयोजित हो रही सीबीटी परीक्षा की शुचिता को संगठित तरीके से प्रभावित किया जा रहा है। सूचना के सत्यापन के बाद प्रयागराज एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 29 जुलाई को नैनी स्थित कौशल विकास भवन में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अलग-अलग कमरों में वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर बैठे सॉल्वर रंगे हाथों पकड़ लिए गए।
परीक्षा केंद्र के भीतर ही चल रहा था फर्जीवाड़े का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि परीक्षा में सफल कराने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से लगभग चार हजार रुपये वसूले जाते थे। इसके बाद प्रवेश पत्र और अन्य विवरण के आधार पर सॉल्वर को कंप्यूटर पर बैठाकर परीक्षा दिलाई जाती थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद वसूली गई रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था।
एसटीएफ के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में संस्थान के प्रधानाचार्य, परीक्षा प्रभारी और कई अनुदेशक सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। वहीं पूर्व में नैनी आईटीआई में तैनात और वर्तमान में बांदा स्थित आईटीआई में कार्यरत एक अनुदेशक पर पूरे गिरोह का संचालन करने का आरोप है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
छापे में भारी मात्रा में नकदी और परीक्षा सामग्री बरामद
कार्रवाई के दौरान पांच कंप्यूटर सिस्टम, पांच मॉनिटर, पांच सीपीयू, की-बोर्ड, माउस, पांच अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्रों की प्रतियां, परीक्षा से जुड़े 67 दस्तावेज, छह मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, पेन ड्राइव सहित परीक्षा पास कराने के एवज में वसूले गए 5.10 लाख रुपये तथा तलाशी में मिले 16,370 रुपये नकद बरामद किए गए।
सॉल्वरों को मिलते थे सिर्फ 500 रुपये
गिरफ्तार सॉल्वरों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें संबंधित अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र की प्रति देकर अलग लैब में बैठाया जाता था। वे रोल नंबर और जन्मतिथि की मदद से लॉग-इन कर पूरी ऑनलाइन परीक्षा हल करते थे। परीक्षा खत्म होने के बाद उन्हें प्रत्येक पेपर के बदले मात्र 500 रुपये दिए जाते थे।
पूछताछ में हुए कई अहम खुलासे
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि परीक्षा केंद्र के भीतर ही सुनियोजित तरीके से फर्जी परीक्षा कराई जाती थी। अभ्यर्थियों से रकम वसूलने, सॉल्वर उपलब्ध कराने, सीटिंग प्लान तैयार करने, परीक्षा संचालन और धन के बंटवारे तक की जिम्मेदारियां अलग-अलग लोगों में बांटी गई थीं। एसटीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ नैनी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2) तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में आगे की विवेचना स्थानीय पुलिस कर रही है, जबकि फरार मुख्य आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है।
