गुरुवार, 30 जुलाई 2026

लखनऊ : पत्रकारों पर बढ़ती कार्रवाई को लेकर कांग्रेस का हमला, अजय राय ने NHRC से मांगी स्वतंत्र जांच।।||Lucknow: Congress attacks increasing crackdown on journalists, Ajay Rai demands independent investigation from NHRC.||

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लखनऊ : 
पत्रकारों पर बढ़ती कार्रवाई को लेकर कांग्रेस का हमला, अजय राय ने NHRC से मांगी स्वतंत्र जांच।।
दो टूक : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अय राय ने दो टूक बोले— पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मानवाधिकार आयोग हस्तक्षेप करे।
विस्तार : 
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और स्वतंत्र रिपोर्टरों के विरुद्ध बढ़ती आपराधिक कार्यवाहियों पर गंभीर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष को पत्र भेजा है। उन्होंने आयोग से इन मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा आवश्यक हस्तक्षेप करने की मांग की है।
अजय राय ने अपने पत्र में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की आधारशिला है। यदि पत्रकार जनहित के मुद्दों पर निर्भय होकर रिपोर्टिंग नहीं कर पाएंगे तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक जवाबदेही और जनता के संवैधानिक अधिकारों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में पत्रकारों और डिजिटल मीडिया कर्मियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों और पुलिस कार्रवाई के कई मामले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हैं। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय, ममता त्रिपाठी, द वायर के पत्रकारों, आल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर तथा दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) सहित कई पत्रकार संगठनों और विधि विशेषज्ञों ने भी समय-समय पर पत्रकारों के खिलाफ हो रही कानूनी कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है।
अजय राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मांग की कि वर्ष 2020 से अब तक उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और स्वतंत्र रिपोर्टरों के विरुद्ध दर्ज सभी आपराधिक मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर यह परीक्षण कराया जाए कि कहीं आपराधिक कानूनों का प्रयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता को प्रभावित करने के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने आयोग से पत्रकार संगठनों और विशेषज्ञों से राय लेकर ऐसी सिफारिशें जारी करने की भी मांग की, जिससे पत्रकारों की संवैधानिक स्वतंत्रता और सुरक्षा को प्रभावी रूप से संरक्षित किया जा सके।