नई दिल्ली:"फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के खिलाफ किसानों का हुंकार, MSP की कानूनी गारंटी और कर्ज़ माफी पर संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रीय महाधिवेशन"
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक//नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के केएस सभागार में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के तत्वावधान में मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-एफटीए) के विरोध में राष्ट्रीय अखिल भारतीय महाधिवेशन का आयोजन किया गया। देशभर से पहुंचे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और नेताओं ने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। सम्मेलन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, सरकारी खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था, किसानों की संपूर्ण कर्ज़ माफी, भूमि अधिग्रहण कानून, बिजली के निजीकरण और कृषि क्षेत्र में बढ़ते कॉरपोरेट हस्तक्षेप जैसे अहम विषय प्रमुखता से उठाए गए।
महाधिवेशन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि "कॉरपोरेट के लिए फ्री ट्रेड और किसानों के लिए बर्बादी स्वीकार नहीं की जाएगी।" उन्होंने कहा कि यदि किसानों को उनकी उपज का कानूनी रूप से सुनिश्चित मूल्य नहीं मिलेगा तो देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि MSP को कानूनी अधिकार बनाए बिना किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।
सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ किसान नेता चौधरी युद्धवीर ने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों की स्मृति में दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर एक भव्य राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा और उनकी याद में एक स्थायी स्मारक बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की योजनाओं को प्राथमिकता देने की भी मांग की गई।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में सरकारों पर किसान संगठनों को कमजोर करने और उनमें विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता है और यही एकजुटता भविष्य में भी किसानों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाएगी। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा, छात्र और मजदूर वर्ग भी किसानों की मांगों के समर्थन में मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है, जो आने वाले समय में किसान आंदोलन को नई दिशा देगा।
महाधिवेशन में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कृषि संकट, बढ़ती लागत, घटती आय और सरकारी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि जब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, कर्ज़ से राहत और सुरक्षित खेती का वातावरण नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस राष्ट्रीय महाधिवेशन में गौतमबुद्ध नगर से भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अशोक भाटी, दादरी जिलाध्यक्ष मनोज मावी, अनिल खारी, सिंहराज गुर्जर, गजेंद्र रेक्सवाल, अजय गुर्जर, सचिन अवाना, मनोज अवाना, राजा चौधरी, आजाद चौधरी, यादराम नेताजी, रामपाल नेताजी, विनोद अधाना, सुमित तंवर, धीरेंद्र भाटी, अनूप नागर, अमित नागर, सुदर्शन सैन, राजकुमार यादव, विपिन तंवर सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों ने सम्मेलन के माध्यम से सरकार से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
