लखनऊ :
पुलिस का बड़ा खुलासा: E-SIM फ्रॉड से चल रहा था 70 लाख का 'डिजिटल अरेस्ट' रैकेट, 2 गिरफ्तार;35 लाख फ्रीज।।
ग्राहकों के KYC का दुरुपयोग कर एक्टिव किए जाते थे फर्जी e-SIM, टेलीग्राम के जरिए कम्बोडिया के साइबर ठगों को बेचे जाते थे भारतीय नंबर।
दो टूक : राजधानी लखनऊ की साइबर क्राइम पुलिस ने ऑपरेशन "CYVAJRA" के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह E-SIM एक्टिवेशन के जरिए विदेशी साइबर अपराधियों को भारतीय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट', निवेश, ट्रेडिंग और OTP फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों में किया जाता था।
विस्तार :
अपर पुलिस उपायुक्त क्राइम किरन यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि एक पीड़ित को खुद को ATS पुणे का अधिकारी बताकर सात दिनों तक वीडियो कॉल पर मानसिक दबाव में रखा गया। मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर उसे तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और अलग-अलग बैंक खातों में 70 लाख ट्रांसफर करा लिए गए। साइबर क्राइम थाना लखनऊ ने शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए 35 लाख की रकम तीन बैंक खातों में फ्रीज करा दी। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी सुमित कुमार रावत, जो एक अधिकृत Jio SIM विक्रेता (POS एजेंट) था, नए सिम या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने आने वाले ग्राहकों के e-KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग करता था। ग्राहक को वैध Jio SIM देने के साथ ही उन्हीं दस्तावेजों पर गुपचुप तरीके से Airtel की ब्लैंक SIM भी एक्टिव कर ली जाती थी।
इन सिम को बाद में e-SIM में बदलकर उनका QR Code तैयार किया जाता और मुख्य सरगना प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ अमित को भेज दिया जाता। प्रवीण इन e-SIM प्रोफाइल को Telegram के माध्यम से करीब 50 USDT प्रति e-SIM की दर से विदेशी साइबर अपराधियों, खासकर कम्बोडिया स्थित गिरोहों, को बेचता था। भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए BYBIT वॉलेट में प्राप्त किया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से:3 मोबाइल फोन,105 सिम कार्ड रैपर
5 खुले सिम,e-SIM और मोबाइल नंबरों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य,
144 USDT वाला BYBIT क्रिप्टो वॉलेट,Telegram चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी।
प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ अमित – मुख्य सरगना
सुमित कुमार रावत – SIM विक्रेता (POS एजेंट)
आईपीएस किरन ने पब्लिक से अपील की है कि भारत में "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। यदि कोई खुद को पुलिस, CBI, ED, ATS या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाए या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो उसकी बातों पर विश्वास न करें। किसी भी साइबर ठगी की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दें। साथ ही नया SIM लेते समय KYC प्रक्रिया स्वयं पूरी करें और यह अवश्य जांच लें कि आपके नाम पर कोई अतिरिक्त SIM जारी तो नहीं हुई है।
