गौतमबुद्धनगर: प्रशासनिक न्यायाधीश अजय भनोट का जिला कारागार निरीक्षण, बंदियों के कौशल विकास और अधिकारों पर दिया विशेष जोर!!
दो टूक//गौतमबुद्धनगर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति एवं गौतमबुद्धनगर के प्रशासनिक न्यायाधीश अजय भनोट ने अपने तीन दिवसीय जनपद भ्रमण के अंतिम दिन जिला कारागार गौतमबुद्धनगर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कारागार में बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा, उनके कौशल विकास, शिक्षा, पुस्तकालय व्यवस्था और रचनात्मक गतिविधियों का जायजा लिया तथा कारागार प्रशासन को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, शिक्षा और व्यक्तित्व विकास का केंद्र भी होना चाहिए।
जिला कारागार पहुंचने पर अधिकारियों ने माननीय न्यायमूर्ति का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने कारागार के विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण करते हुए बंदियों के लिए संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने बताया कि इच्छुक बंदियों को सिलाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, योग एवं मेडिटेशन, संगीत, चित्रकला और नृत्य सहित कई उपयोगी प्रशिक्षण नियमित रूप से दिए जा रहे हैं, ताकि रिहाई के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति अजय भनोट ने जिला कारागार के पुस्तकालय का भी अवलोकन किया और वहां उपलब्ध पुस्तकों एवं अध्ययन व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने बंदियों के लिए संचालित कंप्यूटर, सिलाई, योग, संगीत, चित्रकला और नृत्य प्रशिक्षण कक्षाओं का भी दौरा किया। इस दौरान बंदियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन करते हुए नृत्य, संगीत, सिलाई और कंप्यूटर प्रशिक्षण से संबंधित प्रस्तुतियां दीं, जिनकी न्यायमूर्ति ने सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
माननीय न्यायमूर्ति ने विशेष रूप से विदेशी बंदियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए कि उनके लिए थिएटर, ग्रुप डिस्कशन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों का भी संचालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि विदेशी बंदियों को भी तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियों में समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनमें किसी प्रकार की हीन भावना या असमानता की भावना उत्पन्न न हो।
पुस्तकालय निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विदेशी बंदियों की भाषाओं के अनुरूप पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुस्तकालय में हिंदी, अंग्रेजी और अन्य आवश्यक विदेशी भाषाओं की पुस्तकों का पर्याप्त संग्रह रखने पर भी जोर दिया, ताकि सभी बंदियों को अपनी भाषा में अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कारागार प्रशासन को निर्देश दिए कि कंप्यूटर प्रशिक्षण, हेयर कटिंग, योग एवं मेडिटेशन, चित्रकला, संगीत और नृत्य जैसी गतिविधियों के साथ-साथ थिएटर, नुक्कड़ नाटक और रंगमंच जैसी रचनात्मक गतिविधियों को भी नियमित रूप से संचालित किया जाए। उनका कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम बंदियों के मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कई बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके मुकदमों की स्थिति, कानूनी सहायता और अन्य समस्याओं की जानकारी भी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंदियों की समस्याओं का त्वरित, निष्पक्ष और विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा उनके अधिकारों का पूर्ण संरक्षण किया जाए।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव, अपर जिला जज एवं प्रभारी सचिव डीएलएसए सोमप्रभा मिश्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ह्रिकेष पाण्डेय, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय कुमार, जिला कारागार के जेलर आर.के. मौर्य, संजय साही, उप जेलर सुरजीत सिंह सहित जिला कारागार के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।।
