मंगलवार, 14 जुलाई 2026

गौतमबुद्धनगर: दहेज की बलि चढ़ी ग्रेटर नोएडा की होनहार बेटी प्रियंका: समझौते के बाद भी नहीं रुका उत्पीड़न, मौत ने झकझोरा पूरा परिवार!!

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गौतमबुद्धनगर: दहेज की बलि चढ़ी ग्रेटर नोएडा की होनहार बेटी प्रियंका: समझौते के बाद भी नहीं रुका उत्पीड़न, मौत ने झकझोरा पूरा परिवार!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//ग्रेटर नोएडा। दहेज प्रथा के खिलाफ लगातार चल रहे जागरूकता अभियानों और सख्त कानूनों के बावजूद बेटियों पर अत्याचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रेटर नोएडा की होनहार और शिक्षित बेटी प्रियंका की मौत ने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर ससुराल पक्ष द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने के कारण प्रियंका की जिंदगी दर्द और संघर्ष में बीतती रही। अब उसकी मौत के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

प्रियंका का शव जैसे ही उसके पैतृक गांव सादोपुर पहुंचा, परिवार की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों की आंखें भी नम हो गईं। गांव के श्मशान घाट पर भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी में प्रियंका का अंतिम संस्कार किया गया। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

प्रियंका पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद बीएड की पढ़ाई पूरी की और दिल्ली के एक निजी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। परिवार और समाज को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन विवाह के बाद उनका जीवन खुशियों के बजाय प्रताड़ना और तनाव में बदल गया।

परिजनों के अनुसार प्रियंका का विवाह 8 फरवरी 2023 को मनीष भाटी के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि करीब एक वर्ष पहले प्रियंका और उनके मायके पक्ष ने दिल्ली के विनोद नगर थाने में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद प्रियंका लगभग चार महीने तक अपने मायके में रहीं।

मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच पंचायत भी हुई। पंचायत में प्रियंका के पति मनीष भाटी और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और भविष्य में किसी प्रकार की प्रताड़ना न करने का भरोसा दिया। रिश्ते को बचाने और बेटी का घर बसाने की उम्मीद में मायके पक्ष ने सामाजिक दबाव के बीच प्रियंका को दोबारा ससुराल भेज दिया। परिजनों का आरोप है कि शुरुआती कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन एक-दो महीने बाद फिर से दहेज की मांग को लेकर प्रियंका को प्रताड़ित किया जाने लगा।

प्रियंका के भाई नितिन ने बताया कि उनकी बहन शांत स्वभाव की, आत्मनिर्भर और परिवार की शान थी। उन्होंने कहा कि प्रियंका ने कभी किसी से शिकायत नहीं की, बल्कि हर परिस्थिति में रिश्ते को बचाने की कोशिश करती रही। परिवार का आरोप है कि यदि पहले दर्ज कराए गए मुकदमे के बाद भी ससुराल पक्ष का व्यवहार नहीं बदला, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है।

प्रियंका का परिवार शिक्षा और सरकारी सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठित परिवारों में गिना जाता है। उनके पिता अजीत बैसोया भारतीय टकसाल से सेवानिवृत्त हैं। भाई नितिन एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि दूसरे भाई मनीष प्रोफेसर हैं। बड़ी बहन नीतू दिल्ली पुलिस में उपनिरीक्षक (दारोगा) के पद पर तैनात हैं।

परिवार पर दुखों का यह दूसरा बड़ा आघात है। प्रियंका के दादा स्वर्गीय चौधरी केशराम बैसोया दिल्ली पुलिस में दारोगा रहे थे और उन्होंने अपने सेवा काल में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। उनका निधन 15 जून को हुआ था और अभी परिवार उस शोक से उबर भी नहीं पाया था कि प्रियंका की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

इस घटना ने एक बार फिर दहेज जैसी सामाजिक कुरीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने से सुनिश्चित होगा। सभी की यही मांग है कि प्रियंका को न्याय मिले और इस मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में किसी और बेटी की जिंदगी दहेज की भेंट न चढ़े।।