गौतमबुद्धनगर: विरोध प्रदर्शन से पहले नोएडा में कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट, सतेन्द्र शर्मा बोले— लोकतंत्र की आवाज़ दबाने की कोशिश!!
दो टूक//नोएडा। प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले शनिवार को नोएडा में कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों को पुलिस द्वारा उनके घरों और कार्यालयों पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) किए जाने का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स्टेट कोऑर्डिनेटर एवं नोएडा विधानसभा-61 के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतेन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि शनिवार को उन्हें और अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय सचिव लियाकत चौधरी को नया बास स्थित कार्यालय पर ही पुलिस ने नजरबंद कर दिया। उनका कहना है कि केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि प्रदेश सचिव पुरुषोत्तम नागर और महानगर उपाध्यक्ष विक्रम चौधरी सहित कई अन्य कांग्रेस नेताओं को भी उनके घरों पर पुलिस ने रोक दिया, ताकि वे प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
सतेन्द्र शर्मा ने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है। यदि सरकार विपक्ष की आवाज़ को पुलिस बल के माध्यम से दबाने का प्रयास करती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचना से घबराकर प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय सचिव लियाकत चौधरी ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि जनता की समस्याओं को उठाने वाले नेताओं को विरोध-प्रदर्शन से पहले ही घरों में कैद कर दिया जाए, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से जनता की आवाज़ बुलंद करती रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हाल के समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी विरोध-प्रदर्शन से पहले विपक्षी नेताओं को एहतियातन नजरबंद किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी और विपक्ष की आवाज़ को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से विरोध करेगी।
