शनिवार, 25 जुलाई 2026

गोण्डा :सर्किल रेट का पुनरीक्षण शुरू, 8 अगस्त तक दर्ज कराएं सुझाव व आपत्तियां।||Gonda:Circle rate revision begins; submit suggestions and objections by August 8th.||

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गोण्डा :
सर्किल रेट का पुनरीक्षण शुरू, 8 अगस्त तक दर्ज कराएं सुझाव व आपत्तियां।
15 अगस्त से लागू होगी नई सर्किल रेट सूची, 10 व 12 अगस्त को कलेक्ट्रेट में होगी जनसुनवाई।।
।।संवाददाता - वीरेन्द्र कुमार।।
दो टूक : जनपद गोंडा में वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित सर्किल रेट (संपत्तियों की मूल्यांकन दर सूची) का पुनरीक्षण शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर प्रियंका निरंजन ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टाम्प (सम्पत्ति का मूल्यांकन) नियमावली, 1997 (यथा संशोधित 2015) तथा महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में जनपद की परिसंपत्तियों की मूल्यांकन दर सूची को मानकीकृत प्रारूप पर संशोधित किया जा रहा है। पुनरीक्षित दर सूची को 15 अगस्त 2026 से प्रभावी किया जाना प्रस्तावित है कलेक्टर ने बताया कि गत वर्ष की सर्किल रेट सूची 1 जून 2025 से प्रभावी थी। वर्तमान में नई प्रस्तावित दर सूची तैयार कर प्रत्येक तहसील के उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं उप निबंधक कार्यालयों के साथ-साथ अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) तथा सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय में आमजन के अवलोकन के लिए उपलब्ध करा दी गई है। इच्छुक व्यक्ति कार्यालय समय में प्रस्तावित दर सूची का निरीक्षण कर सकते हैं उन्होंने कहा कि प्रस्तावित दर सूची पर 8 अगस्त 2026 की सायंकाल तक संबंधित कार्यालयों में मौखिक अथवा लिखित रूप से सुझाव एवं आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त होने वाले सुझावों एवं आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए नागरिक समय रहते अपने सुझाव दर्ज कराएं, ताकि अंतिम सूची तैयार करते समय सभी पक्षों का समुचित ध्यान रखा जा सके।
प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का निस्तारण कलेक्टर प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में 10 अगस्त एवं 12 अगस्त को अपराह्न 3 बजे से 5 बजे तक कलेक्ट्रेट सभागार में किया जाएगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.), सहायक महानिरीक्षक निबंधन तथा संबंधित तहसीलों के उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं उप निबंधक सदस्य के रूप में उपस्थित रहेंगे।
कलेक्टर प्रियंका निरंजन ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि प्रस्तावित सर्किल रेट सूची के संबंध में कोई सुझाव या आपत्ति हो तो उसे निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित कार्यालय में अवश्य दर्ज कराएं, ताकि पारदर्शी, व्यावहारिक एवं जनहित में नई मूल्यांकन दर सूची तैयार की जा सके।