शुक्रवार, 5 जून 2026

मऊ : सडा विधि से धान की रोपाई में जुटे किसान,खरपतवार व रोगों से मिल रही राहत।Mau: Farmers are engaged in transplanting rice using the Sada method, finding relief from weeds and diseases.||

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मऊ : 
सडा विधि से धान की रोपाई में जुटे किसान,खरपतवार व रोगों से मिल रही राहत।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक :  खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र के किसान सडा विधि से धान की रोपाई करने में जुट गए हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते इस बार बड़ी संख्या में किसान इस विधि को अपना रहे हैं। किसानों का कहना है कि सडा विधि से धान की खेती करने पर फसल में खरपतवार कम उगते हैं और रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।
कृषि जानकारों के अनुसार सडा विधि में पौधों को उचित दूरी पर लगाया जाता है, जिससे उन्हें पर्याप्त धूप और हवा मिलती है। इसके कारण पौधे स्वस्थ रहते हैं तथा विभिन्न प्रकार के फफूंदजनित और कीटजनित रोगों का खतरा कम हो जाता है। साथ ही खेत में खरपतवार की समस्या भी सीमित रहती है, जिससे किसानों को निराई-गुड़ाई पर कम खर्च करना पड़ता है।
क्षेत्र के किसानों ने बताया कि पारंपरिक तरीके की तुलना में सडा विधि से धान की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है। कम लागत, बेहतर पौध विकास और रोगों से बचाव के कारण किसान इस तकनीक की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी देकर उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इन दिनों गांवों के खेतों में धान की रोपाई का कार्य जोरों पर है। किसान बेहतर उपज और अधिक आमदनी की उम्मीद के साथ पूरे उत्साह से खेती के कार्य में जुटे हुए हैं। यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष धान उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।