शुक्रवार, 12 जून 2026

गौतमबुद्धनगर: स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस की अनूठी पहल, 'ऑपरेशन अपराजेय' के तहत पुलिसकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण!!

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गौतमबुद्धनगर: स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस की अनूठी पहल, 'ऑपरेशन अपराजेय' के तहत पुलिसकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा, 12 जून 2026। स्पेशल नीड (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में "ऑपरेशन अपराजेय (Operation Invictus)" के अंतर्गत शुक्रवार को सेक्टर-108 स्थित पुलिस आयुक्त कार्यालय के ऑडिटोरियम में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पेशल नीड बच्चों की आवश्यकताओं, उनके अधिकारों तथा उनकी सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील पहलुओं के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित करना था, ताकि जरूरत पड़ने पर ऐसे बच्चों और उनके परिवारों को त्वरित एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्पेशल नीड बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, सेवा भाव और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना समाज और पुलिस दोनों की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि "ऑपरेशन अपराजेय" का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक मजबूत, संवेदनशील और निरंतर सहयोग प्रणाली विकसित करना है।

उन्होंने बताया कि इस अभिनव पहल की शुरुआत गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट से की गई है और भविष्य में यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा और पुलिस उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाएगी।

कार्यशाला में यह भी चर्चा की गई कि वर्तमान समय में अधिकांश परिवारों में माता-पिता के नौकरीपेशा होने के कारण बच्चों की देखभाल के लिए केयर टेकर नियुक्त किए जाते हैं। हालांकि कई मामलों में केयर टेकर द्वारा अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन न करने अथवा बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतें सामने आती रही हैं, जो अत्यंत गंभीर विषय है। इसी को ध्यान में रखते हुए "ऑपरेशन अपराजेय" के तहत ऐसे बच्चों की सुरक्षा में पुलिस की सक्रिय और सहयोगात्मक भूमिका सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

पुलिस कमिश्नर ने निर्देश दिए कि मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से ऐसे परिवारों की पहचान की जाए जहां स्पेशल नीड बच्चे निवास करते हैं। साथ ही उनके साथ नियमित संपर्क स्थापित कर उनकी सुरक्षा और आवश्यकताओं की निगरानी की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि केयर टेकर के सत्यापन के दौरान केवल औपचारिक जांच ही नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, मानसिक स्थिति और दायित्वों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी आकलन किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इसके अतिरिक्त ऐसे सभी मामलों का एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने तथा संबंधित पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना पर भी जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि स्पेशल नीड बच्चों की मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक आवश्यकताएं सामान्य बच्चों से अलग हो सकती हैं, इसलिए उनके साथ व्यवहार करते समय विशेष संवेदनशीलता और धैर्य की आवश्यकता होती है।

कार्यशाला में एमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रो. (डॉ.) जयंती पुजारी, डीन फैकल्टी ऑफ रिहैबिलिटेशन साइंसेज एवं निदेशक, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ रिहैबिलिटेशन साइंसेज (AIRS), डॉ. अनुसूया के. यादव, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीएसडब्ल्यू तथा डॉ. राम शंकर सक्सेना, एसोसिएट प्रोफेसर ने विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। वहीं AIRS की फैकल्टी सदस्य सुश्री तान्या बत्रा, सुश्री अरीबा शाहब, सुश्री स्नेहा डबराल और सुश्री कंचन नागर ने भी पुलिस अधिकारियों को स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, व्यवहारिक जरूरतों और संवेदनशील पुलिसिंग से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यक्रम में अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र तथा पुलिस उपायुक्त महिला सुरक्षा श्रीमती सुनीति भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी पुलिस बल को समाज के कमजोर और विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले वर्गों के प्रति अधिक मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।

गौरतलब है कि गौतमबुद्धनगर पुलिस की यह पहल केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उन बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार करने का प्रयास है, जिन्हें विशेष देखभाल और अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है। "ऑपरेशन अपराजेय" के माध्यम से कमिश्नरेट पुलिस ने यह संदेश दिया है कि स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है और पुलिस इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।।