गौतमबुद्धनगर: वैदपुरा के श्री संत विनोबा भावे इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति चुनाव पर उठे सवाल, धांधली और गुपचुप प्रक्रिया के आरोपों से मचा विवाद!!
दो टूक//ग्रेटर नोएडा/वैदपुरा। श्री संत विनोबा भावे इंटर कॉलेज, वैदपुरा की प्रबंध समिति के गठन की प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। कॉलेज की प्रबंध समिति के चुनाव में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता के अभाव और गुपचुप तरीके से चुनाव कराने के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।
आरोप है कि हाल ही में गौतमबुद्ध नगर से स्थानांतरित हो चुकी खाद्य एवं जिला आपूर्ति अधिकारी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया। विरोध करने वाले समिति सदस्यों का कहना है कि उन्हें चुनाव की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। जब इस संबंध में चुनाव अधिकारी से आपत्ति दर्ज कराई गई तो उनका कहना था कि 15 जून 2026 को सभी संबंधित सदस्यों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से सूचना पत्र भेज दिए गए थे।
हालांकि, आपत्ति दर्ज कराने वाले सदस्यों का दावा है कि उन्हें आज तक कोई स्पीड पोस्ट प्राप्त नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि वास्तव में सूचना भेजी गई थी तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
मामले में यह आरोप भी लगाया गया है कि कॉलेज परिसर के मुख्य द्वार पर चुनाव संबंधी नोटिस कुछ समय के लिए चस्पा किया गया और उसकी फोटो लेने के बाद तत्काल हटा दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को सार्वजनिक करने के बजाय सीमित दायरे में रखने का प्रयास किया गया।
विरोध कर रहे लोगों का यह भी आरोप है कि निर्धारित तिथि और समय पर चुनाव अधिकारी स्वयं कॉलेज नहीं पहुंचीं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पूरे दिन कॉलेज परिसर और आसपास सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की गई, लेकिन चुनाव अधिकारी के पहुंचने की पुष्टि नहीं हो सकी। इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में दादरी क्षेत्र के एक प्रभावशाली राजनेता की भूमिका हो सकती है। वहीं कुछ लोगों का यह भी दावा है कि चुनाव अधिकारी पर दबाव एवं अन्य प्रकार के प्रलोभन का असर हो सकता है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर कर्मवीर नागर प्रमुख ने मांग की है कि स्पीड पोस्ट भेजे जाने के पूरे रिकॉर्ड की जांच कराई जाए, चुनाव अधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो तथा जांच पूरी होने तक प्रबंध समिति के गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि संत विनोबा भावे के नाम पर स्थापित शिक्षण संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होना आवश्यक है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आरोपों की जांच होती है तो उसके बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।।
