गौतमबुद्धनगर: ग्रेटर नोएडा में SSC भर्ती परीक्षा में हाईटेक नकल रैकेट का भंडाफोड़, STF ने 50 लाख कैश समेत 7 आरोपियों को दबोचा!!
प्रॉक्सी सर्वर, स्क्रीन शेयरिंग और सॉल्वर गैंग के जरिए चल रहा था ऑनलाइन परीक्षा में धांधली का खेल, कई बड़ी भर्ती परीक्षाओं में नेटवर्क के शामिल होने की आशंका
दो टूक//ग्रेटर नोएडा में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में धांधली कराने वाले एक बड़े हाईटेक गिरोह का उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सनसनीखेज खुलासा किया है। STF नोएडा यूनिट ने नॉलेज पार्क स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर छापेमारी कर परीक्षा में नकल कराने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लगभग 50 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, मोबाइल फोन, राउटर, एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि यह गिरोह कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित CAPF, SSF कांस्टेबल (GD) और असम राइफल्स भर्ती परीक्षा-2026 में हाईटेक तकनीक के जरिए अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से पास कराने का काम कर रहा था। STF की कार्रवाई के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
परीक्षा केंद्र से संचालित हो रहा था पूरा सिंडिकेट
STF के अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्र के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप चौहान निवासी मुजफ्फरनगर, अरुण कुमार निवासी मथुरा, संदीप भाटी निवासी बुलंदशहर, निशांत राघव निवासी बुलंदशहर, अमित राणा निवासी बागपत, शाकिर मलिक निवासी बागपत और विवेक कुमार निवासी बुलंदशहर के रूप में हुई है। इनमें शाकिर मलिक और विवेक कुमार परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी बताए गए हैं, जबकि अन्य आरोपी पूरे रैकेट को संचालित कर रहे थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी प्रदीप चौहान बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र का संचालन करता था और उसी केंद्र पर SSC की ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जा रही थी। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने की योजना तैयार की।
ऐसे करते थे ऑनलाइन परीक्षा में नकल
पूछताछ में आरोपियों ने STF को बताया कि परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर नेटवर्क में प्रॉक्सी सर्वर लगाया गया था। इसके जरिए ऑनलाइन परीक्षा की स्क्रीन को स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन की मदद से बाहर बैठे सॉल्वर तक पहुंचाया जाता था। सॉल्वर प्रश्नों के उत्तर तुरंत हल कर वापस भेज देते थे, जिन्हें अभ्यर्थी ऑनलाइन परीक्षा में भरते थे।
पुलिस के मुताबिक यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था ताकि परीक्षा एजेंसी और निगरानी सिस्टम को इसकी भनक तक न लगे। गिरोह प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने के बदले लगभग चार लाख रुपये तक वसूलता था।
IT हेड और लैब सुपरवाइजर की भी भूमिका संदिग्ध
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अरुण कुमार परीक्षा केंद्र का IT सेटअप संभालता था और वही प्रॉक्सी सर्वर सहित तकनीकी नेटवर्क तैयार करता था। वहीं संदीप भाटी विभिन्न कंपनियों में लैब सुपरवाइजर के रूप में काम कर चुका है और ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था जो पैसे देकर नौकरी हासिल करना चाहते थे।
STF को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में इसी तरह की धांधली को अंजाम दे रहा था। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित अभ्यर्थियों की पहचान की जा सके।
STF की बड़ी कार्रवाई से भर्ती माफियाओं में हड़कंप
STF की इस बड़ी कार्रवाई के बाद भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय नकल माफियाओं और साइबर गिरोहों में हड़कंप मच गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और अब तक कितने अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से परीक्षा पास कराई गई है।
फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। STF अधिकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।।
