लखनऊ :
सीएम के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे मोहनलालगंज तहसील अधिकारी, वर्षों से न्याय को भटक रहे किसान,नही हो रही सुनवाई।
दो टूक : प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों को जनता की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण करने के निर्देश दे रहे हैं। तहसीलों में लंबित मामलों के जल्द निपटारे और फरियादियों को अनावश्यक चक्कर न कटवाने के आदेश कई बार दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद मोहनलालगंज तहसील में जिम्मेदार अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेशों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। यहां गरीब किसान और आम फरियादी वर्षों से न्याय की आस में तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।स्थिति यह है कि सुनवाई पूरी होने के बाद भी मुकदमों में महीनों तक आदेश सुरक्षित रखे जा रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि अधिकारी न तो समय पर मिलते हैं और न ही मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। मजबूर होकर लोग सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं, लेकिन वहां भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय खानापूर्ति में जुटे हैं।
तमोरिया निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब दो वर्ष पहले वरासत दर्ज कराने के लिए आवेदन किया था। मामला नायब तहसीलदार निगोहां की अदालत में चल रहा था और सुनवाई भी पूरी हो चुकी है, लेकिन आज तक आदेश नहीं किया गया। प्रमोद का आरोप है कि वह कई बार नायब तहसीलदार से मिलकर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। आदेश न होने से उनकी जमीन से जुड़े जरूरी कार्य भी अटके पड़े हैं। परेशान होकर उन्होंने सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कर न्याय दिलाने की मांग की है।
वहीं उत्तरगांव निवासी अखिलेश कुमार ने बताया कि खतौनी में हुई गड़बड़ी को ठीक कराने के लिए उन्होंने एसडीएम न्यायिक की अदालत में मुकदमा दायर किया था। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद करीब ढाई माह पहले आदेश सुरक्षित कर लिया गया, लेकिन अब तक फैसला नहीं सुनाया गया। अखिलेश का आरोप है कि तहसील पहुंचने पर एसडीएम न्यायिक अक्सर मिलते नहीं हैं और पेशकार लगातार टालमटोल कर रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।सबसे हैरानी की बात यह है कि अखिलेश द्वारा सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत करने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उसी आरोपी रीडर को जांच सौंप दी गई, जिस पर लापरवाही और टालमटोल का आरोप है। इससे पीड़ितों में भारी नाराजगी है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि तहसील में लंबित मामलों का अंबार लगा हुआ है। गरीब किसान और आम नागरिक महीनों नहीं बल्कि वर्षों तक न्याय के इंतजार में भटकते रहते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा तहसीलों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बदहाल बने हुए हैं। लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि फरियादियों को समय पर न्याय मिल सके।
