शुक्रवार, 22 मई 2026

गौतमबुद्धनगर: जिला कारागार में कानूनी व्यवस्था की गहन पड़ताल, महिला बंदियों से रूबरू हुईं डीएलएसए सचिव!!

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गौतमबुद्धनगर: जिला कारागार में कानूनी व्यवस्था की गहन पड़ताल, महिला बंदियों से रूबरू हुईं डीएलएसए सचिव!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण कर दिए सख्त निर्देश, हर बंदी को समयबद्ध विधिक सहायता सुनिश्चित करने पर जोर

दो टूक//गौतमबुद्धनगर, 22 मई 2026।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर के मार्गदर्शन में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) शिवानी रावत ने शुक्रवार को जिला कारागार गौतमबुद्धनगर का निरीक्षण कर वहां संचालित विधिक सहायता व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने महिला बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार एवं उप जेलर सुरजीत सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में कुल 2432 बंदी निरुद्ध हैं। सचिव डीएलएसए ने महिला बैरक का निरीक्षण करते हुए महिला बंदियों के लिए विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया, जिसमें बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं तथा न्यायिक प्रक्रिया संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

शिवानी रावत ने महिला बंदियों से उनके मुकदमों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा संबंधित अभिलेखों और मुकदमा कार्डों का निरीक्षण किया। पूछताछ के दौरान महिला बंदियों ने बताया कि उन्हें निजी अधिवक्ता अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता उपलब्ध कराए गए हैं। इस पर सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि सभी बंदियों के मुकदमा कार्डों पर अधिवक्ताओं के नाम स्पष्ट रूप से अंकित किए जाएं, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

निरीक्षण के दौरान महिला बैरक में साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। सचिव डीएलएसए ने कहा कि कारागार में निरुद्ध प्रत्येक बंदी को समयबद्ध एवं प्रभावी विधिक सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बंदी बिना कानूनी सहायता के न रहे।

इसके अतिरिक्त जिला कारागार में स्थापित विधिक सहायता केंद्र का भी निरीक्षण किया गया। यहां बंदी पीएलवी (पैरालीगल वॉलंटियर) द्वारा अन्य बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता संबंधी कार्यों की समीक्षा की गई। सचिव ने पीएलवी द्वारा संधारित रजिस्टरों एवं अभिलेखों के रखरखाव को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा विधिक सहायता प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने पर बल दिया।

इस अवसर पर यह भी जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के क्रम में जिला कारागार के मुलाकाती स्थल पर शीघ्र ही एक विशेष हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी। इस हेल्प डेस्क के माध्यम से बंदियों के परिजनों को विधिक सलाह, मुकदमों से संबंधित जानकारी एवं विभिन्न कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। माना जा रहा है कि यह पहल बंदियों और उनके परिवारों के लिए काफी सहायक सिद्ध होगी।।