मंगलवार, 12 मई 2026

गौतमबुद्धनगर: जिला कारागार में विधिक सहायता व्यवस्था की पड़ताल, बंदियों को समय पर कानूनी मदद देने के निर्देश!!

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गौतमबुद्धनगर: जिला कारागार में विधिक सहायता व्यवस्था की पड़ताल, बंदियों को समय पर कानूनी मदद देने के निर्देश!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// गौतमबुद्धनगर, 12 मई 2026।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर के निर्देश पर मंगलवार को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवानी रावत ने जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में स्थापित लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों के लिए विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन भी किया गया, जिसमें उन्हें उनके अधिकारों, निःशुल्क कानूनी सहायता एवं मुकदमों की पैरवी संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। निरीक्षण के समय जेलर संजय साही एवं उप जेलर सुरजीत सिंह भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि वर्तमान में जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में कुल 2479 बंदी निरुद्ध हैं। सचिव शिवानी रावत ने विशेष रूप से किशोर बैरक का निरीक्षण कर वहां निरुद्ध किशोर बंदियों से उनके मुकदमों, अधिवक्ताओं की उपलब्धता तथा कानूनी सहायता से संबंधित जानकारी ली। उन्होंने बंदियों के मुकदमों से जुड़े कार्डों का भी अवलोकन किया और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि प्रत्येक बंदी को समय से विधिक सहायता उपलब्ध हो।

किशोर बंदियों ने बताया कि उन्हें निजी अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता उपलब्ध कराए गए हैं। इस पर सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि सभी बंदियों के मुकदमा कार्ड पर अधिवक्ताओं के नाम स्पष्ट रूप से अंकित किए जाएं, ताकि किसी भी बंदी को कानूनी सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो। साथ ही किशोर बैरक में साफ-सफाई एवं सुव्यवस्थित वातावरण बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए।

इसके बाद जिला कारागार में स्थापित विधिक सहायता केन्द्र पर आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बंदियों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। शिविर में मौजूद किशोर बंदियों ने बताया कि सभी को अधिवक्ता उपलब्ध हैं और उन्हें मुकदमों की पैरवी में सहयोग मिल रहा है।

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जेल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला कारागार में कोई भी बंदी अधिवक्ता की सुविधा से वंचित न रहे और प्रत्येक बंदी को समय पर आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि बंदियों के अधिकारों की रक्षा एवं उन्हें न्याय दिलाने के लिए विधिक सहायता व्यवस्था का प्रभावी संचालन बेहद आवश्यक है।

निरीक्षण के दौरान जिला कारागार में कार्यरत बंदी पीएलवी (पैरालीगल वालंटियर) द्वारा अन्य बंदियों को प्रदान की जा रही विधिक सहायता संबंधी कार्यों की भी समीक्षा की गई। सचिव ने पीएलवी द्वारा संधारित रजिस्टर एवं अभिलेखों के उचित रखरखाव और उन्हें नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश दिए।

यह निरीक्षण जिला कारागार में विधिक सहायता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।।