रायबरेली :
बिना वारंट आधी रात घर में घुसी पुलिस,महिला ने लगाया गम्भीर आरोप।
क्या योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के विपरीत हुई कार्रवाई?” पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार।
दो टूक : उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सख्त संदेश देने वाली योगी सरकार के बीच रायबरेली जनपद के थाना बछरावां क्षेत्र के एक दूर दराज गांव से ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला थाना बछरावां क्षेत्र ग्राम कुर्री सुदौली निवासी रंजना सैनी पत्नी अमित सैनी ने आरोप लगाया है कि 10 मई 2026 की रात लगभग 1:20 बजे लखनऊ के थाना पीजीआई से आई पुलिस टीम बिना स्थानीय थाना बछरावां पुलिस को सूचना दिए उनके घर दबिश के नाम पर घर मे घुस गई। कभी कमरो मे उथल पुथल मचाया।पीड़िता के अनुसार उस समय वह अपने छोटे बच्चों के साथ कमरे में सो रही थीं, जबकि उनके पति घर पर मौजूद नहीं थे।
पीड़िता का आरोप है कि कई पुलिस कर्मी और दरोगा सीधे कमरे तक पहुंच गए, पूछताछ की तथा परिवार को भयभीत किया। महिला का कहना है कि जब उन्होंने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की तो पुलिसकर्मी वहां से निकलने लगे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कमरे में रखे सोने के आभूषण गायब मिले। पीड़िता ने एक एसआई अशोक सिंह सहित कुछ पुलिस कर्मियों की पहचान का दावा भी किया है। मामले को लेकर क्षेत्र में भारी चर्चा और आक्रोश व्याप्त है।
थाना पीजीआई पुलिस की माने तो अमित सैनी निवासी ग्राम कुर्री सुदौली थाना बछरावां जनपद रायबरेली के विरुद्ध थाने मुकदमा दर्ज है जिसके सम्बन्ध कई बार सम्पर्क कर उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया। लेकिन स्थानीय थाने में उपस्थित नही हो रहे है। उन्ही तलाश कघ जा रही है लगाए गए आरोप बेबुनियाद है।
स्थानीय पुलिस को सूचना न देना बना बड़ा सवाल।
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि किसी दूसरे जनपद की पुलिस किसी अन्य जिले में दबिश देने जाती है, तो क्या स्थानीय थाना और चौकी को सूचना देना आवश्यक नहीं है?
पीड़िता का आरोप है कि थाना बछरावां पुलिस को इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
कानूनी जानकारों के अनुसार, दूसरे जिले में दबिश के दौरान स्थानीय पुलिस को सूचना देना पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वहीं महिलाओं से जुड़े मामलों में महिला पुलिसकर्मी की उपस्थिति, पहचान उजागर करना तथा कार्रवाई का स्पष्ट आधार बताना भी आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन और पुलिस प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कार्रवाई के दौरान निर्धारित नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया?
विशेषज्ञों का कहना है कि —
रात में महिलाओं के घर में प्रवेश को लेकर विशेष सावधानी अपेक्षित होती है।
बिना महिला पुलिसकर्मी कार्रवाई पर सवाल उठ सकते हैं।
तलाशी या दबिश के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य माना जाता है।
दूसरे जनपद में कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस समन्वय जरूरी प्रक्रिया मानी जाती है।
परिवार में भय, ग्रामीणों में नाराजगी।
घटना के बाद पीड़ित परिवार भयभीत बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कानून के राज और पुलिस जवाबदेही की बात करते हैं, ऐसे में इस प्रकार के आरोप सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े करते हैं।
मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप मांग किया है।
पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डीजीपी उत्तर प्रदेश, रायबरेली पुलिस अधीक्षक एवं मानवाधिकार आयोग से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने, कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
