रविवार, 3 मई 2026

गाज़ियाबाद,“डासना जिला कारागार में सुधार की नई मिसाल: नवग्रह वाटिका, गांधी व संगीत गैलरी से बदली ‘जेल’ की तस्वीर”!!

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गाज़ियाबाद,“डासना जिला कारागार में सुधार की नई मिसाल: नवग्रह वाटिका, गांधी व संगीत गैलरी से बदली ‘जेल’ की तस्वीर”!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//गाजियाबाद। डासना स्थित जिला कारागार अब केवल एक दंडस्थल नहीं, बल्कि ‘संस्कार, सुधार और सकारात्मक ऊर्जा’ का केंद्र बनकर उभर रहा है। रविवार को परम पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज (जूना पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर) और प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग ने यहां नवग्रह वाटिका, गांधी गैलरी एवं संगीत गैलरी का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर कारागार परिसर में आध्यात्मिकता, संस्कृति और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान कारागार पहुंचने पर मुख्य द्वार पर शंखनाद के साथ स्वामी जी का भव्य स्वागत किया गया, वहीं प्रमुख सचिव को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके पश्चात दोनों विशिष्ट अतिथियों ने पूरे कारागार का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और बंदियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की सराहना की।

भ्रमण के दौरान महिला अहाते का निरीक्षण करते हुए स्वामी जी ने महिला बंदियों से संवाद किया और उनके लिए संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रशंसा की। इस दौरान उनके साथ रह रहे बच्चों को फल, मिष्ठान, कॉपी एवं पेंसिल वितरित किए गए। बच्चों ने गायत्री मंत्र और कविताएं सुनाकर उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ नवग्रह वाटिका के शिलापट्ट अनावरण से हुआ, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पौधों का रोपण किया गया। इस वाटिका का उद्देश्य कारागार परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और बंदियों के बीच मानसिक शांति, प्रेम व सद्भाव को बढ़ावा देना है।

इसके बाद डॉ. सम्पूर्णानंद पुस्तकालय में स्थापित गांधी गैलरी का उद्घाटन किया गया। इस गैलरी में महात्मा गांधी के जीवन, उनके विचारों और आंदोलनों से जुड़ी पुस्तकें, चरखा तथा बंदियों द्वारा निर्मित पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। स्वामी जी ने इसे “वैचारिक क्रांति का केंद्र” बताते हुए कहा कि यह पहल बंदियों को आत्मचिंतन और आत्म-सुधार के मार्ग पर प्रेरित करेगी।

संगीत गैलरी के उद्घाटन अवसर पर स्वामी जी ने कहा, “संगीत ईश्वर की वह भाषा है, जो कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बना सकती है।” उन्होंने इसे बंदियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का सशक्त माध्यम बताया।

अतिथियों ने कारागार की पाकशाला का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की सराहना की तथा मंदिर परिसर में शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजन भी किया। इसके साथ ही एम्ब्रॉयडरी, पेंटिंग, सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर, हेयर कटिंग और होम डेकोर जैसे विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन कर बंदियों के प्रयासों की प्रशंसा की।

आर्ट गैलरी में प्रदर्शित बंदियों की पेंटिंग्स ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। जेल रेडियो के माध्यम से बंदियों को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि “मनुष्य का मन ही उसके बंधन और मोक्ष का कारण है,” और गीता के श्लोक “कर्मानुबंधिनी मनुष्यलोके” का उल्लेख करते हुए अच्छे कर्मों के महत्व पर बल दिया।

प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने स्वामी जी को बंदियों द्वारा बनाई गई पोट्रेट भेंट करते हुए इसे सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया और कहा कि उनके आगमन से कारागार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।

जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने कहा कि आमतौर पर कारागार को दंडस्थल के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस तरह की पहलों से यह ‘संस्कार गृह’ और ‘तपोस्थली’ में परिवर्तित हो रहा है, जहां बंदियों के जीवन में सुधार और नई उम्मीद की किरण जागृत हो रही है।

इस अवसर पर कारापाल के.के. दीक्षित, वरिष्ठ चिकित्सा परामर्शदाता एम.के. तोमर, उप कारापाल बृजेश नारायण पाण्डेय, शिवानी यादव, विजयलक्ष्मी गुप्ता, मनीष मिश्रा सहित अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।