मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही उजागर: करोड़ों से बने पार्क बने खंडहर, चौधरी बीसी प्रधान ने खोला मोर्चा!!

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गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही उजागर: करोड़ों से बने पार्क बने खंडहर, चौधरी बीसी प्रधान ने खोला मोर्चा!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा।
नोएडा प्राधिकरण द्वारा शहर को हरित और सुंदर बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किए गए पार्क आज बदहाली का शिकार हो चुके हैं। गांव बरौला स्थित चौधरी चाँद सिंह पार्क इसकी एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है, जहां रखरखाव के अभाव में पार्क पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है।

इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए किसान नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता चौधरी बीसी प्रधान ने प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि बरौला क्षेत्र के कई पार्कों की स्थिति बेहद खराब है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।

चौधरी बीसी प्रधान, जो क्षेत्र में किसानों और आम नागरिकों के हक की आवाज़ बुलंद करने के लिए जाने जाते हैं, ने बताया कि चौधरी चाँद सिंह पार्क की दुर्दशा को लेकर कई बार उद्यान विभाग के निदेशक आनंद मोहन को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत के चलते पार्कों का रखरखाव केवल कागजों तक सीमित है। शिकायत के बाद कभी-कभार पानी डालकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, लेकिन पार्क के विकास या सुधार के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहां एक ओर पार्क बदहाल पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर ठेकेदारों को समय पर भुगतान किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।

चौधरी बीसी प्रधान ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालिक अधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पार्कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो क्षेत्र के लोग आंदोलन और प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।

उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ एक पार्क का मामला नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास और उनके टैक्स के पैसे से जुड़ा सवाल है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो जनआक्रोश बड़ा रूप ले सकता है।”