मंगलवार, 12 मई 2026

गौतमबुद्धनगर: नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: बैंक अधिकारी बनकर करते थे साइबर ठगी, APK फाइल से उड़ाते थे लाखों रुपये!!

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गौतमबुद्धनगर: नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: बैंक अधिकारी बनकर करते थे साइबर ठगी, APK फाइल से उड़ाते थे लाखों रुपये!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

फेज-1 पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो साइबर अपराधी गिरफ्तार; मोबाइल, गोल्ड-सिल्वर कॉइन बरामद

दो टूक//नोएडा। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की थाना फेज-1 पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए सेक्टर-2 स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताकर लोगों को केवाईसी अपडेट और रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का झांसा देते थे। इसके बाद मोबाइल फोन में एपीके फाइल इंस्टॉल कराकर खातों और क्रेडिट कार्ड से लाखों रुपये की ठगी को अंजाम देते थे।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, धोखाधड़ी से खरीदे गए गोल्ड और सिल्वर कॉइन बरामद किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों के मोबाइल नंबरों के खिलाफ देशभर में एनसीआरपी पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।

सेक्टर-2 की बिल्डिंग में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर

थाना फेज-1 पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से मंगलवार को सेक्टर-2 स्थित सी-90 बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की। यहां से पुलिस ने विकास कुमार और सूरज नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे कमीशन बेस पर काम करते थे और विभिन्न बैंकों, खासकर एयू बैंक और एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड ग्राहकों का डाटा अवैध रूप से हासिल करते थे। इसके बाद खुद को बैंक कर्मचारी बताकर ग्राहकों को कॉल करते और क्रेडिट कार्ड केवाईसी अपडेट करने या रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का लालच देते थे।

बैंक ऐप जैसी APK फाइल से करते थे पूरा खेल

आरोपियों ने लोगों के मोबाइल फोन में बैंकिंग ऐप जैसी दिखने वाली एपीके फाइल इंस्टॉल करवाई। जैसे ही ग्राहक उस फर्जी ऐप में अपने क्रेडिट कार्ड की डिटेल, कार्ड नंबर और सीवीवी दर्ज करते, सारी जानकारी सीधे आरोपियों तक पहुंच जाती थी।

इतना ही नहीं, एपीके फाइल की मदद से ट्रांजेक्शन का ओटीपी भी आरोपियों के मोबाइल पर पहुंच जाता था। इसके बाद आरोपी ब्लिंकिट, जेप्टो और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड और सिल्वर कॉइन खरीद लेते थे। डिलीवरी किसी रैंडम पते पर मंगवाई जाती थी और बाद में उन कॉइन को बेचकर रकम हड़प ली जाती थी।

ठगी के बाद तोड़ देते थे सिम कार्ड

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी कुछ समय तक कॉल करने के बाद इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड को तोड़कर फेंक देते थे ताकि पुलिस ट्रैक न कर सके। साइबर ठगी के इस तरीके से विभिन्न राज्यों में कई लोगों को निशाना बनाया गया।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार (31 वर्ष) मूल रूप से हापुड़ जनपद का रहने वाला है और वर्तमान में गाजियाबाद के गोविंदपुरम इलाके में रह रहा था। वहीं दूसरा आरोपी सूरज (20 वर्ष) हाथरस का निवासी है और फिलहाल दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रह रहा था।

पहले भी साइबर ठगी में जेल जा चुका है मुख्य आरोपी

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी विकास कुमार के खिलाफ पहले भी थाना सेक्टर-63 में धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। अब फेज-1 थाने में भी बीएनएस की धारा 318(2), 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बरामदगी

  • ठगी में इस्तेमाल 03 मोबाइल फोन
  • 02 पीली धातु के सिक्के (गोल्ड कॉइन)
  • 02 सफेद धातु के सिक्के (सिल्वर कॉइन)

पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और डेटा सप्लाई करने वाले नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से आरोपियों के डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है।।