रागिनी सम्राट स्व. महाशय सतपाल दौसा की 5वीं पुण्यतिथि पर उमड़ेगी लोक संस्कृति की स्वरांजलि!!
दो टूक// गाजियाबाद:: लोक विधा रागिनी को देशभर में नई पहचान दिलाने वाले, अपनी जादुई आवाज़ और अद्भुत प्रस्तुति से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले रागिनी जगत के सम्राट, सरस्वती पुत्र स्वर्गीय महाशय सतपाल दौसा जी की 5वीं पुण्यतिथि पर 21 मई 2026 को भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम जनपद गाजियाबाद के मोदीनगर स्थित ग्राम दौसा बंजारपुर के वैदिक संस्कृति स्कूल परिसर में आयोजित होगा, जहां प्रदेशभर से आए प्रसिद्ध रागनी कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से उन्हें स्वरांजलि अर्पित करेंगे।
स्व. महाशय सतपाल दौसा केवल एक रागनी गायक नहीं थे, बल्कि लोक संस्कृति और ग्रामीण समाज की आत्मा की आवाज़ थे। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब तक उनकी गायकी का ऐसा जादू था कि जहां भी उनका मंच लगता, वहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। उनकी बुलंद आवाज़, प्रभावशाली शब्द और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रागनियां लोगों के दिलों को सीधे छू जाती थीं।
उन्होंने अपनी रागनियों के माध्यम से किसान, मजदूर, शोषित वर्ग और समाज की पीड़ा को आवाज़ दी। वहीं हास्य-व्यंग्य से भरपूर ननद-भावज की तकरार जैसी रचनाओं ने ग्रामीण संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। “सूरज ने ली मांग रोशनी”, “ऐसा बीज बो दिया ताने”, “पटड़े से तले उतर जा” और महाभारत पर आधारित उनकी रागनियां आज भी लोगों की जुबान पर हैं और नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।
महाशय सतपाल दौसा जी मूल रूप से गाजियाबाद के मोदीनगर स्थित ग्राम दौसा बंजारपुर के निवासी थे। उन्होंने अपनी कला और मेहनत के दम पर रागिनी को गांव की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनकी गायकी में केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने का संदेश भी छिपा होता था। यही कारण है कि उन्हें रागिनी जगत का शिरोमणि और सम्राट कहा जाता था।
21 मई 2021 को मेरठ के एक अस्पताल में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था। उनके निधन से लोक संगीत जगत को ऐसी क्षति पहुंची जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। आज भी जब उनकी रागनियां मंचों पर गूंजती हैं तो श्रोताओं की आंखें नम हो जाती हैं और लोग उनकी यादों में खो जाते हैं।
स्व. महाशय सतपाल दौसा जी के जेष्ठ पुत्र आदेश दौसा ने जानकारी देते हुए बताया कि पुण्यतिथि कार्यक्रम में अनेक प्रसिद्ध रागनी कलाकार भाग लेंगे और अपने गीतों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोग, लोक कलाकार, समाजसेवी और हजारों की संख्या में श्रोता उपस्थित रहेंगे।
लोक संस्कृति के आकाश में स्व. महाशय सतपाल दौसा एक ऐसे चमकते सितारे थे, जिनकी आवाज़ भले ही आज खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी रागनियां और उनके द्वारा दिए गए संस्कार हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। उनकी पुण्यतिथि केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और रागिनी परंपरा के प्रति सम्मान और गर्व का प्रतीक है।
