गुरुवार, 14 मई 2026

लखनऊ: ससुर ने दी दामाद को मुखाग्नि, प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार ने छेड़ी परंपरा और अधिकार पर नई बहस!!

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लखनऊ: ससुर ने दी दामाद को मुखाग्नि, प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार ने छेड़ी परंपरा और अधिकार पर नई बहस!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और भाजपा नेता Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन हो गए। गुरुवार, 14 मई 2026 को लखनऊ के भैंसाकुंड स्थित बैकुंठ धाम में पूरे राजनैतिक और सामाजिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन इस अंतिम विदाई के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को लेकर नई बहस छेड़ दी।

प्रतीक यादव को मुखाग्नि उनके ससुर और अपर्णा यादव के पिता अरविंद सिंह बिष्ट ने दी। आमतौर पर हिंदू परंपरा में पुत्र, भाई या निकट रक्त संबंधी द्वारा अंतिम संस्कार किए जाने की परंपरा रही है। ऐसे में ससुर द्वारा दामाद को मुखाग्नि दिए जाने को लेकर सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक जानकारों तक चर्चा तेज हो गई कि क्या सनातन परंपरा में ससुर को यह अधिकार प्राप्त है।

बैकुंठ धाम में हुए अंतिम संस्कार के दौरान सपा प्रमुख Akhilesh Yadav, वरिष्ठ नेता Shivpal Singh Yadav, आदित्य यादव सहित पूरा यादव परिवार मौजूद रहा। प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव, उनकी बेटियां प्रथमा और पद्मजा तथा अन्य परिजनों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। शव यात्रा के दौरान आदित्य यादव ने अर्थी को कंधा दिया, जबकि पूरे वातावरण में गम और संवेदनाओं का माहौल दिखाई दिया।

प्रतीक यादव के निधन के बाद सबसे अधिक चर्चा मुखाग्नि की परंपरा को लेकर रही। हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और मोक्ष से जुड़ा संस्कार माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार का विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक ग्रंथ गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार और मुखाग्नि से जुड़े नियमों का विस्तार से उल्लेख मिलता है। जानकारों के अनुसार, मुखाग्नि का पहला अधिकार पुत्र को माना गया है। यदि पुत्र न हो या वह छोटा हो तो पिता, भाई, पौत्र या अन्य रक्त संबंधी यह दायित्व निभा सकते हैं। कई परिस्थितियों में पत्नी और पुत्री द्वारा मुखाग्नि दिए जाने को भी मान्यता दी गई है।

हालांकि शास्त्रों में ससुर द्वारा दामाद को मुखाग्नि देने का स्पष्ट उल्लेख कम मिलता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में दामाद को ‘यमराज का स्वरूप’ भी कहा गया है और गोत्र अलग होने के कारण सामान्यतः ससुर अंतिम संस्कार नहीं करता। लेकिन कई विद्वानों का मानना है कि धर्म का मूल उद्देश्य मृत आत्मा की शांति और संस्कार की पूर्णता है। विशेष परिस्थितियों में परिवार की सहमति, भावनात्मक संबंध और कर्तव्य को भी महत्व दिया जाता है।

प्रतीक यादव की दो बेटियां हैं और परिवार ने परिस्थितियों तथा भावनात्मक निर्णय के आधार पर अरविंद सिंह बिष्ट द्वारा मुखाग्नि दिलाने का फैसला लिया। यही वजह है कि इस घटना ने परंपरा और बदलते सामाजिक दृष्टिकोण के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रही। एक ओर जहां यादव परिवार शोक में डूबा दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर अंतिम संस्कार की यह परंपरा समाज में रिश्तों, धार्मिक मान्यताओं और बदलते समय के बीच संतुलन को लेकर बड़ा सवाल छोड़ गई।।