शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

गौतमबुद्धनगर:“नोएडा के अस्पतालों में ‘पैसे दो–रिपोर्ट लो’ रैकेट का पर्दाफाश, स्टिंग में फर्जी MLC का खेल उजागर”!!

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गौतमबुद्धनगर:“नोएडा के अस्पतालों में ‘पैसे दो–रिपोर्ट लो’ रैकेट का पर्दाफाश, स्टिंग में फर्जी MLC का खेल उजागर”!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

 दो टूक// नोएडा,नोएडा के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पैसे लेकर फर्जी मेडिकल लीगल केस (MLC) और चोटों की रिपोर्ट तैयार करने का संगठित रैकेट संचालित होने का खुलासा हुआ है। इस पूरे खेल का पर्दाफाश एक पीड़ित युवक द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन से हुआ, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

 स्टिंग ऑपरेशन में खुली सच्चाई

दिल्ली निवासी इमलाक हुसैन ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने झूठे मारपीट के आरोप में फर्जी MLC बनवाकर उनके और परिवार के खिलाफ केस दर्ज कराया। मामले में कई विसंगतियां मिलने पर उन्हें शक हुआ और उन्होंने खुद सच्चाई सामने लाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन किया।

पीड़ित के मुताबिक, सबसे पहले वह दादरी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां बिना किसी जांच के कर्मचारियों ने 11 हजार रुपये लेकर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर दी। इसके बाद उन्हें नोएडा जिला अस्पताल भेजा गया।

 60 हजार में ‘गंभीर चोट’ की रिपोर्ट

नोएडा जिला अस्पताल में कथित तौर पर 60 हजार रुपये लेकर गंभीर चोटों की झूठी रिपोर्ट बनाई गई। रिपोर्ट में कान का पर्दा फटना, पसली टूटना जैसी गंभीर चोटें दर्शाई गईं, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं था। इस तरह की रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिससे उसे मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

मामले के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। नोएडा जिला अस्पताल के सीएमएस अजय राणा के अनुसार, एक टेक्नीशियन को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा दादरी CHC के एक वार्ड बॉय को भी सस्पेंड किया गया है।

जांच कमेटी गठित

पूरे प्रकरण की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 बड़ा सवाल

यह मामला न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। अगर पैसे के दम पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार हो रही हैं, तो निर्दोष लोगों को फंसाना बेहद आसान हो जाता है।

निष्कर्ष:
नोएडा में सामने आया यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस रैकेट के पीछे छिपे बड़े चेहरों पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।