शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

लखनऊ :एसआईआर की प्रक्रिया गैर कानूनी तथा लोकतंत्र के साथ धोखा है : अजय राय।।||Lucknow:The SIR process is illegal and a betrayal of democracy: Ajay Rai.||

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लखनऊ :
एसआईआर की प्रक्रिया गैर कानूनी तथा लोकतंत्र के साथ धोखा है : अजय राय।।
दो टूक : उत्तर प्रदेश में कराई गई एस.आई.आर. की प्रक्रिया गैर कानूनी है और लोकतंत्र के साथ धोखा है तथा जनता के मतदान संबंधी अधिकारों का हनन है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  अजय राय ने एस.आई.आर. के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में आरटीआई एक्टिविस्ट अंजलि भारद्धाज ने जब चुनाव आयोग से अपनी आरटीआई में एसआईआर सम्बन्धी पत्रावली और आदेशों की कॉपी मांगा तो चुनाव आयोग के प्रमुख सचिव ने अपने जवाब में बताया कि आयोग में एस.आई.आर.और उसके आदेश सम्बन्धी कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं है और न ही कोई आदेश जारी किया गया है तब क्या एस.आई.आर. भाजपा के आदेश पर हो रही है? दूसरी तरफ संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे व्यापक पैमाने पर एस.आई.आर. कराई जा सके।
श्री राय ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा भाजपा के दबाव में एस.आई.आर के दौरान गलत काम करने के लिए बी.एल.ओ. पर दबाव बनाया गया जिसके चलते प्रदेश में कई बी.एल.ओ. की जान चली गई।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सवाल उठाया है  कि जब उत्तर प्रदेश की 18 वर्ष से अधिक की आबादी 16 करोड़ से ज्यादा है और ग्राम पंचायतों तथा नगर निकायों के लिए बनी हुई मतदाता सूची में भी मतदाताओं की संख्या 16 करोड़ से अधिक है जबकि वो भी इसके लिए बनाए गए चुनाव आयोग द्वारा बनाई गई है। तब वर्तमान एसआईआर के बाद मतदाता सूची जिसमें मतदाताओं की संख्या पहले 15 करोड़ से अधिक थी और अब उससे और ज्यादा बढ़नी चाहिए थी उसकी जगह वह मात्र 13 करोड़ 69 लाख कैसे हो गई है?
श्री राय ने कहा कि यह व्यापक जाँच का विषय है कि इतनी बड़ी संख्या में किन लोगों के नाम सूची से काटे गए है। क्या यह बंगाल की तरह कुछ समुदाय विशेष के लोगों के नाम एक रणनीति के तहत चिन्हित कर काटे गए हैं?
श्री  राय ने वर्तमान मतदाता सूची को स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव से पूर्व व्यापक जांच करके जो 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं उन सभी के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाए और यदि केन्द्रीय चुनाव आयोग इस कार्य को करने में असमर्थ है तो नगर निकाय और ग्राम पंचायत के मतदाता सूची को ही चुनाव के लिए इस्तेमाल किया जाए।