लखनऊ :
रिकवरी एजेंटों ने आशियाना में दिनदहाड़े पत्रकार से मारपीट कर छीनी वैगनआर,थाने मे दी तहरीर।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना आशियाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक पत्रकार से दबंगों रिकवरी एजेंटों ने मारपीट कर जबरन वैगनआर कार छीन लिया। पीड़ित ने घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस की सुस्त कार्यशैली से नाराज पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है। वाहन लोन पर लिया था जिसकी किन्ही परिस्दोथितियों बस दो किस्त टूट गई थी इस पर रिकवरी ऐजेंटो ने घटना को अंजाम दिया।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय कुमार निवासी कुबेर बागिया, तेलीबाग, पीजीआई लखनऊ मे परिवार के साथ रहते है और एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र एवं पत्रकार संगठन से जुड़े हुए है। इनके अनुसार शनिवार 4 अप्रैल को जरुरी काम से अपनी वैगनआर कार (UP32 JN 9837) से आशियाना क्षेत्र के पकरी पुल होते हुए जा रहे थे। तभी अचानक आधा दर्जन लोग उनके सामने आकर गाड़ी रोक लिया और अपने आपको रिकवरी एजेंट बताते हुए कहा कि गाड़ी की किस्त बकाया है, जबकि पीड़ित के अनुसार मात्र दो माह की किस्त ही लंबित थी और इस संबंध में कोई पूर्व नोटिस या सूचना भी नहीं दी गई थी।
पीड़ित संजय का आरोप है कि आरोपियों ने गाली गलौज कर मारपीट करते हुए जबरन गाड़ी छीनकर आशियाना स्थित अन्नपूर्णा कॉम्प्लेक्स ले गए।इतना ही नहीं, गाड़ी में रखा पीड़ित का पर्स भी नही लेने दिया । जिसमें करीब ₹5000 नकद, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, प्रेस पहचान पत्र, वोटर आईडी व दो एटीएम कार्ड (बैंक ऑफ इंडिया व इंडियन ओवरसीज बैंक) सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद है आरोपियों ने पीड़ित पर कागजों पर हस्ताक्षर करने व ओटीपी साझा करने का दबाव भी बनाया, जो कि पूरी तरह अवैध है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि दिनदहाड़े इस तरह की घटनाएं होती रहीं और पुलिस मूकदर्शक बनी रही, तो आम जनता की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
पीड़ित ने थाना आशियाना में लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करती है या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। फिलहाल पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलकर घटना अवगत कराने की बात कही है।
भारतीय पत्रकार एवं मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे बी सिंह ने बताया कि ऐसी घटना निंदनीय है । रिकवरी एजेंट के विरुद्ध स्थानीय आशियाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई करनी चाहिए। यदि कार्रवाई नही होती है तो विरोध प्रदर्शन के लिए पत्रकार संगठन मजबूर होगा।।
