लखनऊ- शिक्षा के व्यवसायीकरण और निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ राष्ट्रीय छात्र पंचायत का आंदोलन 10 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के राजधानी में पहुंच गया। हजरतगंज स्थित जीपीओ पार्क में आयोजित प्रदर्शन ने सूबे की मौजूदा सरकार और शिक्षा विभाग को स्पष्ट संदेश दिया है। यह जानकारी देते हुए राष्ट्रीय छात्र पंचायत के गोण्डा निवासी राष्ट्रीय अद्द्यक्ष शिवम पाड़े ने मीडिया को बताया कि इस प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने उनके गोंडा और लखनऊ स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें नजरबंद करने का प्रयास किया, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर अपने समर्थकों के साथ धरना स्थल पर अचानक पहुँच गए। शिवम पांडे ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों अभिभावकों और छात्रों के भविष्य की है। उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा की हम अपनी मांगों को लेकर पूर्व में सूबे के सीएम को अपने खून से पत्र लिख चुके हैं। दर्जनों बार शासन से लेकर जिला प्रशासन तक को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन प्रशासन ने इस तरफ कोई ध्यान नही दिया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान हमारे संगठन ने सीएम को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा है। शिवम पांडे ने कहा कि हमने प्रशासन को एक माह का समय दिया है। यदि एक माह के भीतर निजी स्कूलों की फीस वृद्धि, हर साल किताबें बदलने की मनमानी और ड्रेस के नाम पर हो रही कमीशनखोरी पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राष्ट्रीय छात्र पंचायत पूरे प्रदेश में 'सड़क भरो आंदोलन' करेगी।"
वहीं पर उपस्थित राष्ट्रीय छात्र पंचायत के लखनऊ अध्यक्ष अमन सिंह पटेल ने बताया कि हमने इस बाबत सीएम को गांव- गांव से लाखों पत्र लिखवाया और अपने खून से पत्र तक लिखा लेकिन हमारी आवाज को सभी अधिकारियों ने अनदेखा और अनसुना कर दिया। अगर इस बार हमारी आवाज को फिर से दबाने का काम सरकार करेगी तो अगले एक महीने में हम पूरे उत्तर प्रदेश में गली-गली में प्रदर्शन करेंगे। मौके पर अमन सिंह पटेल, उदित सिंह, अमन यादव, अंकित वर्मा, रुद्र प्रताप सिंह, अभिषेक शर्मा, हर्षित यादव, अमन चौधरी, सत्यम वर्मा, आर्यन पांडे, नितिन पाठक, राहुल सिंह, समीन हैदर, अमन गुप्ता, ओम वर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।
प्रमुख मांगें------
1. निजी स्कूलों द्वारा प्रतिवर्ष की जाने वाली अवैध फीस वृद्धि पर तत्काल रोक लगाने हेतु अध्यादेश लाया जाए।
2. कमीशनखोरी रोकने के लिए किताबों और ड्रेस को खुले बाजार में उपलब्ध कराना अनिवार्य हो।
