गौतमबुद्धनगर: हिमालय प्राइड में ‘हैंडओवर संग्राम’: AOA बनाम बिल्डर टकराव, पुलिस बुलानी पड़ी!!
दो टूक// ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हिमालय प्राइड सोसाइटी शुक्रवार को उस वक्त विवाद का केंद्र बन गई, जब हैंडओवर प्रक्रिया के दौरान AOA (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) और बिल्डर प्रबंधन आमने-सामने आ गए। मामूली बहस से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि स्थिति संभालने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। सोसाइटी के मुख्य गेट पर लंबे समय तक नारेबाजी और तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
हैंडओवर प्रक्रिया में अड़चन, भड़का विवाद
यह पूरा मामला बिसरख कोतवाली क्षेत्र का है, जहां प्राधिकरण के निर्देशों के तहत सोसाइटी का हैंडओवर AOA को किया जा रहा था। शुरुआत में प्रक्रिया सामान्य रही, लेकिन जल्द ही विवाद ने तूल पकड़ लिया।
AOA और निवासियों का आरोप है कि बिल्डर प्रबंधन ने अपने पुराने हाउसकीपिंग और सिक्योरिटी स्टाफ को दोबारा सोसाइटी में तैनात करने की कोशिश की। निवासियों का कहना है कि जब प्रबंधन AOA को सौंपा जा रहा है, तो इस तरह का हस्तक्षेप नियमों के खिलाफ है और इससे हैंडओवर प्रक्रिया में भ्रम और बाधा पैदा होती है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जो बाद में टकराव में बदल गई।
पुलिस की मौजूदगी में भी गरमाया माहौल
विवाद बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन निवासियों ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कुछ लोगों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और पुलिस की मौजूदगी में ही बिल्डर के लोगों को अंदर लाने की कोशिश की गई।
हालात बिगड़ते देख बड़ी संख्या में निवासी सोसाइटी गेट पर जमा हो गए और बिल्डर के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से हैंडओवर का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब भी प्रक्रिया में बाधाएं डाली जा रही हैं।
AOA पहले से गठित, फिर क्यों अटक रहा हैंडओवर?
निवासियों के मुताबिक, सोसाइटी में AOA का गठन पहले ही विधिवत किया जा चुका है और पूरी कमेटी मौजूद है। प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत ही हैंडओवर प्रक्रिया शुरू की गई थी, ताकि सोसाइटी का संचालन पूरी तरह निवासियों के हाथ में आ सके।
इसके बावजूद मौजूदा विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या बिल्डर जानबूझकर प्रक्रिया में देरी कर रहा है? क्या नियमों का पालन सही तरीके से हो रहा है?
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हैं। अब सभी की नजर प्राधिकरण और प्रशासन पर टिकी है कि वे इस विवाद में क्या रुख अपनाते हैं और कब तक हिमालय प्राइड सोसाइटी का हैंडओवर पूरी तरह से पूरा हो पाता है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाउसिंग सोसाइटीज में हैंडओवर प्रक्रिया कितनी जटिल और विवादित होती जा रही है।।
