शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

हिरासत में पत्रकार से मारपीट का आरोप: मानवाधिकार आयोग सख्त, गाजियाबाद पुलिस से 7 मई तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट!!

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हिरासत में पत्रकार से मारपीट का आरोप: मानवाधिकार आयोग सख्त, गाजियाबाद पुलिस से 7 मई तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//गाजियाबाद। थाना साहिबाबाद क्षेत्र में एक पत्रकार के साथ कथित पुलिस पिटाई और अवैध हिरासत के गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस प्रकरण को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए गाजियाबाद पुलिस आयुक्त को विस्तृत और निष्पक्ष जांच कर 7 मई 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है।

यह मामला पत्रकार अभिषेक पंडित से जुड़ा है, जिन्होंने 23 मार्च 2025 को आयोग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि 19 मार्च 2025 की रात थाना साहिबाबाद में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रभाकर सिंह और सब-इंस्पेक्टर सौरभ गौतम ने उन्हें चौकी शनि चौक के बाहर और अंदर घसीटते हुए बेरहमी से पीटा। इतना ही नहीं, बिना किसी वैध आधार के उन्हें अवैध रूप से हिरासत में भी रखा गया।

मेडिकल के बाद भी हवालात में रखने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 20 मार्च 2025 की रात करीब 12 बजे उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें थाना साहिबाबाद की हवालात में ही बंद रखा गया। जबकि पुलिस रिकॉर्ड में यह दर्शाया गया कि 20 मार्च 2025 की दोपहर 12:30 बजे उन्हें लाजपत नगर स्थित आर्य समाज मंदिर से गिरफ्तार किया गया था। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

आयोग की सुनवाई में उठे अहम सवाल
18 अगस्त 2025 को पारित आदेश में सहायक पुलिस आयुक्त श्वेता यादव की रिपोर्ट और बयान का हवाला देते हुए आयोग ने माना कि मेडिकल के बाद भी पत्रकार को हवालात में रखा गया था। सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि पत्रकार पहले से ही पुलिस हिरासत में था।

आयोग की पीठ ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि 20 मार्च की रात से लेकर उसी दिन दोपहर 12:30 बजे तक पत्रकार कहां था। इस पर अभिषेक पंडित ने स्पष्ट कहा कि वह पूरे समय हवालात में ही बंद रहे। आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और पुलिस की जीडी एंट्री में भी इस तथ्य की पुष्टि होने की बात सामने आई।

जांच रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल
10 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के दौरान पत्रकार ने ट्रांस हिंडन के उपायुक्त निमिष पाटिल और सहायक पुलिस आयुक्त (शालीमार गार्डन) अतुल कुमार सिंह की जांच रिपोर्ट को फर्जी और मनगढ़ंत बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा आयोग को गुमराह कर दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

पत्रकार ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी जैसे सीबीसीआईडी, सीबीआई या न्यायिक मजिस्ट्रेट से जांच कराने की मांग भी की है।

आयोग के सख्त निर्देश
पत्रकार की आपत्तियों और उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने गाजियाबाद पुलिस आयुक्त को मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि मामले में आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें 7 मई को पेश होने वाली जांच रिपोर्ट और 8 मई की सुनवाई पर टिकी हैं।।