गुरुवार, 26 मार्च 2026

मऊ :घोसी सांसद राजीव राय ने मऊ के लिए मांगा "एम्स" ।।||Mau:Ghosi MP Rajiv Rai Demands "AIIMS" for Mau.||

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मऊ :
घोसी सांसद राजीव राय ने मऊ के लिए मांगा "एम्स" ।।
दो टूक : सांसद राजीव राय ने कहा 'एम्स' बनाने हेतु सरकार द्वारा जमीन की अनुपलब्धता होने पर खुद जमीन उपलब्ध कराने की कही बात।
विस्तार :
मऊ जनपद के घोसी सांसद ने कहा- “अगर सरकार को जमीन नहीं मिलती तो मैं स्वयं जमीन ख़रीद कर सरकार को देने का लिखित वादा करता हूँ। चाहे इसके लिए मुझे अपनी कोई संपत्ति भी बेचनी पड़े तो कोई बात नहीं।”

घोसी सांसद ने नियम 377 के अधीन मांग करते हुए कहा- मऊ जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति काफी कमजोर है और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बहुत सीमित है। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग है कि मऊ में एम्स की स्थापना की जाए, ताकि बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। प्रस्तावित एम्स से मऊ के साथ-साथ आसपास के जिलों-बलिया, गाजीपुर और आजमगढ़ को भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा बिहार के सीमावर्ती जिले जैसे बक्सर के लोगों को भी सुविधा मिलेगी। वर्तमान में पूर्वांचल का एकमात्र एम्स गोरखपुर में है, जो मऊ से 100 किलोमीटर से अधिक दूर है, जिससे मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और वहां अत्यधिक दबाव बना रहता है। मऊ प्रमुख सड़कों के किनारे स्थित है, जहां जनसंख्या और यातायात अधिक होने के कारण सड़क दुर्घटनाएं भी ज्यादा होती हैं। लेकिन यहां गंभीर चोटों के इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर जैसी विशेष सुविधाएं नहीं है, जिसके कारण मरीजों को वाराणसी या गोरखपुर ले जाना पड़ता है और इलाज में देरी होती है। मऊ में एम्स बनने से आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं मजबूत होंगी, मृत्यु दर कम होगी और क्षेत्र का विकास भी होगा। इसके लिए परदहां मिल की जमीन या अन्य उपलब्ध भूमि दी जा सकती है, या आवश्यकता होने पर हम स्वयं भूमि उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार हैं। अतः जनहित में मऊ में एम्स की स्थापना को शीघ्र मंजूरी दी जाए।

सांसद राजीव राय ने कहा- “घोसी लोकसभा के साथ अब सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा ना कोई सरकारी बहाना चलेगा।”

घोसी सांसद राजीव राय के इस मानवीय दृष्टिकोण एवं अति महत्वपूर्ण मांग का घोसी लोकसभा के आम नागरिकों द्वारा अत्यंत प्रशंसा की जा रही है। 

मऊ में एम्स की स्थापना होने से न सिर्फ बेहतर चिकित्सा सेवा हेतु मऊ अन्य जनपदों का केंद्र बिंदु बनेगा बल्कि सुदूर शहरी क्षेत्र में इलाज हेतु जाने वालों के लिए अपने क्षेत्र में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का एक मजबूत माध्यम भी मिलेगा।