मंगलवार, 3 मार्च 2026

लखनऊ : पत्रकारों को लेकर वायरल कथित तुगलकी फरमान की हो जांच और कार्रवाई: जे० बी० सिंह।||Lucknow: Investigate and take action against the viral alleged Tughlaq decree regarding journalists: J.B. Singh.||

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लखनऊ
पत्रकारों को लेकर वायरल कथित तुगलकी फरमान की हो जांच और कार्रवाई: जे० बी० सिंह।
दो टूक : भारतीय पत्रकार एवं मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पुलिस अधिकारी की कथित आदेशित आडियो को संज्ञान मे लेते हुए आपत्ति जाहिर की है और कहा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर आघात है।
विस्तार
बताते चले कि सोशल मीडिया एक आडियो तेजी से वायरल हो रही जिसमें एक जिम्मेदार आफसर द्वारा अपने अधीनस्थ थानों को यह कथित निर्देश दिए जा रहा कि यदि कोई पत्रकार थाने में वीडियो बनाते हुए पाया जाए तो उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्यवाही किया ऐसा करने पर दिवसाधिकारी के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह आडियो मेरठ जनपद के महिला पुलिस अधिकारी सौम्या महोदया का बताया जा रहा है जिसे लेकर पत्रकारों एवं पत्रकार संगठनों मे भारी आक्रोश।
 भारतीय पत्रकार एवं मानवाधिकार परिषद के अध्यक्ष जितेन्द्र बहादुर इस कथित आदेश की घोर निंदा करते हुए कहा कि यह फरमान पूर्णतः अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं। यदि उन्हें तथ्य संकलन, रिपोर्टिंग या दृश्य रिकॉर्डिंग से रोका जाएगा, तो यह पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास माना जाएगा। ऐसे आदेश से प्रदेश के पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है तथा उनके पेशागत मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
यदि यह निर्देश व्यक्तिगत स्तर पर जारी किया गया है, तो यह अत्यंत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। यदि यह उच्चाधिकारियों की जानकारी में है, तो उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भारतीय पत्रकार एवं मानवाधिकार परिषद  मांग करता है कि प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
2- जांच पूर्ण होने तक संबंधित सीओ एवं जिले के एसएसपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। 3. पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। 4. भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई पर कठोर अनुशासनात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं।
हम उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), देश के माननीय प्रधानमंत्री तथा  से मांग करते हैं कि इस गंभीर प्रकरण को तत्काल संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश जारी करें।
लोकतंत्र में सत्ता की पारदर्शिता सुनिश्चित करना पत्रकारों का दायित्व है। चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार की रोक-टोक, धमकी या दमन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।